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Shashi Aswal

Romance


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Shashi Aswal

Romance


बोल दो ना

बोल दो ना

1 min 310 1 min 310


है जो इन आँखों में छुपा बोल दो ना 

अब अपने दिल की जुबाँ बोल दो ना 


जो जूडा़ है बनाया मैंने तुम्हारे लिए 

जरा इन्हें अपने हाथों से खोल दो ना 


अक्सर नशीली आँखें मुझसे जो कहती है

जरा निगाहों से इसे मुझमें घोल दो ना 


है जो ये बेनाम रिश्ता हमारे बीच

इसे नाम दे के जरा तोल दो ना 


बेमोल हो चुकी मेरी इस जिंदगी में 

खुद को मिला के इसको मोल दो ना...



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