STORYMIRROR

Shashi Aswal

Tragedy Children

4  

Shashi Aswal

Tragedy Children

पाँच रुपये

पाँच रुपये

1 min
276


लाल, पीले, हरे, नीले, सब है उसके पास

गोल, लम्बे, चौडे़, दिलाकर, गुब्बारे है उसके पास


बिखरे बाल, चौरस आँखें, चेहरे पर हल्की मुस्कान

हर आने-जाने वाले इंसान पर, टिकी है उसकी आस


कभी इस गली तो कभी उस सड़क पर

कड़कती धूप में चल-चल के, फुल चुकी उसकी साँस


अचानक बाप-बेटी आके, रूके उसके पास

बेटी उत्सुकता से करनी लगी, गुब्बारों की जाँच


अपने जैसा छोटा पर प्यारा, गुब्बारा चुना उसने

पर दोनों के मुस्कान की कीमत, सिर्फ़ पाँच रुपये।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy