N.ksahu0007 @writer
Drama
प्रेम याद की भावना में, बह गए हम
तोड़ गई ये दिल, अकेले रह गए हम
कहते भी तो क्या कहते सनम तुम्हें
छुपाकर ये गम अपना सह गए हम
खुशियों से भरा रहे ,तेरा दामन सदा
बिछड़ते वक्त यही बात कह गए हम।
बदलता वक्त
तेरे चाहत का ...
वो इश्क़ याद आ...
घिसी चप्पल
ख़्याल में तुम
मुख़ौटा_ओढ़कर
आख़िरी मुलाकात
शब्द से मोती
पिता का साया ...
गीत बनकर जुबा...
पिता की आज्ञा मानना हमारी परम्परा है, इसी का पालन करते बालक नचिकेता यमराज के द्वार जाता है... और फिर... पिता की आज्ञा मानना हमारी परम्परा है, इसी का पालन करते बालक नचिकेता यमराज के द्व...
प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए। प्रकृति , पार्वती , सीता के रूप में आदरांजलि के लिए।
पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये
डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं। डगमगाने लगा स्वर्ग सिंहासन, गगन मैं दानवों दी किलकारी हैं।
वादा है, हमारा हम सब से, वक्त से आगे, बढ़ कर दिखाएंगे। वादा है, हमारा हम सब से, वक्त से आगे, बढ़ कर दिखाएंगे।
उसके हिस्से की ख़ुशियाँ रौंदकर, ठहाके लगाते हैं झूम झूमकर। उसके हिस्से की ख़ुशियाँ रौंदकर, ठहाके लगाते हैं झूम झूमकर।
रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में रहिए ना अब ऐसे भरम में मिलेंगे हम अब अगले जनम में
अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात अजीब थी वो सर्दी वाली बारिश की रात
कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में। कान्हा का जन्मदिन है, ओ बड़ी धूम मची ब्रज में।
इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है। इस ओर हर ओर, मैं देखूं जिस भी ओर, एक उत्सव सा लगता है।
किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस ! किसी की न कीजिए तलाश अब रुक जाइए करिये आराम बस !
सहेज कर रखती हूँ जिदंगी की किताब के लम्हे, कलम से टंकित करती हूँ। सहेज कर रखती हूँ जिदंगी की किताब के लम्हे, कलम से टंकित करती हूँ।
बहुत जल्द मेरी तुम्हारी अधूरी मोहब्बत से आखिरी मुलाक़ात होने वाली है। बहुत जल्द मेरी तुम्हारी अधूरी मोहब्बत से आखिरी मुलाक़ात होने वाली है।
वो नुक्कड़ वाले प्यार का अपना ही मजा होता है। वो नुक्कड़ वाले प्यार का अपना ही मजा होता है।
दुःख, दर्द, तकलीफ सत्य कराते, अहसास खुदगर्ज जग में, खुद के सिवा कोई न पास दुःख, दर्द, तकलीफ सत्य कराते, अहसास खुदगर्ज जग में, खुद के सिवा कोई न पास
हुई पुरानी चार दिन वो, खटकन लागी हर आंखों को। हुई पुरानी चार दिन वो, खटकन लागी हर आंखों को।
तू ख़्वाब अधूरा मगर सुंदर बहुत है तू दर्द है सीने में... ये राहत बहुत है तू ख़्वाब अधूरा मगर सुंदर बहुत है तू दर्द है सीने में... ये राहत बहुत है
बेटे की जिद थी की शादी करुंगा ताे इसी लडकी से... माॅं ने भी हां में भर दी, बेटे की खुशी के लिए... ले... बेटे की जिद थी की शादी करुंगा ताे इसी लडकी से... माॅं ने भी हां में भर दी, बेटे ...
वही होगा यहां पर बेईमानों का बाप जिसके भीतर जल रही, ईमानदारी आग। वही होगा यहां पर बेईमानों का बाप जिसके भीतर जल रही, ईमानदारी आग।
हम पैसे को मानते है, भगवान तू मानवता को मानता है, भगवान हम पैसे को मानते है, भगवान तू मानवता को मानता है, भगवान