तसव्वुर-ए-शब
तसव्वुर-ए-शब
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इश्क़ हँसाता है, हाँ इश्क़ रुलाता है,
दर्द जुदाई का, यह ज़हर पिलाता है।
चाहते हैं तुमको, हम आज भी ओ जानाँ,
कौन भला अपना, वो प्यार भुलाता है।
वो हसीं सा चेहरा, अब पास नहीं मेरे,
मुझको तसव्वुर ख़ाब-ए-शब में सताता है।
राज़-ए-सनम की बातें, महज़ रहीं बातें,
उजड़ा हुआ गुलशन, फिर कौन सजाता है!
प्रेम की यादें दिल में चुपके से कहती हैं,
प्यार दिखा कर वो ताउम्र निभाता है।
राह 'नवीं',जो देखे शाम सजाने को
शख़्स वही अब खंजर हाथ दिखाता है
-प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)
जिला - महासमुन्द (छःग)
