तत्व चिंतन
तत्व चिंतन
बह्र –बहरे रमल मुसम्मन महज़ूफ़
इसे रमल मुसम्मन मक़्तू भी कहते हैं।
अरकान – फ़ाएलातुन - फ़ाएलातुन - फ़ाएलातुन - फ़े
मीटर / वज़्न – 2122 - 2122 - 2122 -2
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शीर्षक:- तत्व चिंतन
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सामने अंतिम विदा का दृश्य सुंदर है,
देह तो बाहर ही खड़ी थी,जान अंदर है।
मौन बैठो चेतना से सोच कर देखो,
पार करना अब हमें मोह का समुंदर है।
रात ढलने को हुई, आई विदाई अब,
आसमाँ भी रो रहा धुँधला सा चद्दर है।
ढूँढता फिरता रहा संसार में जिसको,
आज जाना आत्मा ही देव मंदर है।
योद्धा कितने यहाँ जो गर्व में फूले,
काल के आगे कहाँ कोई धुरंदर है।
तत्व चिंतन का विधाता ने लिखा जो भी,
पढ़ रहा है अब नवीं उसको पुरंदर है।
शुक्रिया और सादर वंदन,
सर्वाधिकार सुरक्षित
All Rights Reserved
©प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)
जिला - महासमुन्द (छत्तीसगढ़)
19/sep./2026
