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प्रेमयाद कुमार नवीन

Abstract

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प्रेमयाद कुमार नवीन

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तेरा दिवाना जिंदा है

तेरा दिवाना जिंदा है

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यादों के झरोखे में वो मासूम सा बचपन जिंदा है,

दोस्तों संग बिताया वो शरारती लड़कपन जिंदा है।

बेफ़िक्र होकर घूमते थे जिन गलियों में कभी हम,

आज बड़े होने के बाद वहाँ बस अकेलापन जिंदा है।


तुम हमे ना मिली यही मलाल रहेगा जीवन भर,

जुबां ख़ामोश है लेकिन आँखों में नमी जिंदा है।


मोहब्बत छोड़,बदल जाने वालों पर जुर्माना जिंदा है।

झूठी उम्मीद जगा कर आँखों का भरमाना जिंदा है।

वो साफ़ मुकर गए हमारी महफ़िल में हमें पहचानने से,

फिर भी उस नागिन सी लड़की का वो शर्माना ज़िंदा है।


तेरी चाहत में तुम्हारा ये दिवाना जिंदा है।

उनके लिए वक्त,हमारे लिए बहाना जिंदा है।

सितमगर सहने वाले दर्द जुबां पे लाते नही,

बस खुद से खुद को अब समझाना जिंदा है।

सर्वाधिकार सुरक्षित
© प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)



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