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प्रेमयाद कुमार नवीन

Abstract

4.5  

प्रेमयाद कुमार नवीन

Abstract

चार पँक्ति

चार पँक्ति

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ज़िंदगी के रंगमंच पर चलता कोई नाटक हूँ।

कलम से पन्नों पर बिखरा एक खरा हाटक हूँ।

सृजन की इस हसीं शाम का साक़ी है नवीन

हाँ मैं लेखक होने से पहले एक अच्छा पाठक हूँ।


© प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)


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