STORYMIRROR

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract

4  

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract

मजबूत शक

मजबूत शक

1 min
620

शक

की

आंधी

चली

अनेकों

रिश्ते

धराशाई

हो गए

सूखेे

पत्तों की

तरह

प्रेम

जो कि

सच्चा था

अच्छा था

मजबूत था

प्यारा था

अटूट था

उसको भी

शक ने

विश्वास की

नींव को

उखाड़ते हुए

नेस्तनाबूद

कर दिया

प्रेम से भी

ज्यादा

ताकतवर

शक है

विश्वास पर

शक

भारी है. 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract