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प्रेमयाद कुमार नवीन

Abstract

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प्रेमयाद कुमार नवीन

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जिंदा है

जिंदा है

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जुदा होकर भी धड़कनों में वो इंक़लाब ज़िंदा है,


'नवीन' की सुलगती यादों का वो सैलाब ज़िंदा है।

हम तो टूट कर बिखर गए उनके जाने के बाद,

पर डायरी के पन्नों में सूखा हुआ वो गुलाब ज़िंदा है।

दिल में आज भी तेरा ही ख़्वाब ज़िंदा है,

आँखों में वही मोहब्बत बेहिसाब ज़िंदा है।

लाख कोशिशें की हमने उनको भुलाने की मगर,

प्रेमयाद-ए-नवीन ग़ज़ल बन ज़वाब जिंदा है।

अभी तलक हर सितम का हिसाब ज़िंदा है,

'नवीन' के लिखे उल्फ़त की किताब ज़िंदा है।

वो भूले तो नहीं होंगे हमारे उस बेपनाह प्यार को,

भुलाने को उन्हें आज भी वो शराब ज़िंदा है।


-सर्वाधिकार सुरक्षित

© प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)


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