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प्रेमयाद कुमार नवीन

Romance

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प्रेमयाद कुमार नवीन

Romance

शीर्षक:- निगाहों में रहो

शीर्षक:- निगाहों में रहो

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बह्र ― हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ मजबूब

अरकान– मफ़ऊल - मुफ़ाईलु - मुफ़ाईलु - फ़अल

मीटर / वज़्न – 221-1221-1221-12
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 फूलो की तरह,   सब की    निगाहों में रहो,

ख़ुशबू   की   तरह, आम   हवाओं  में रहो।

 मंज़िल की तरफ़  बढ़ते ही  जाएँ ये क़दम,

तुम धूप   से  बच  कर ही तो, राहों में रहो।

 सूरज की तपिश तुम को छुए भी न कभी,

पेड़ों   की   घनी    ठंडी   पनाहों   में  रहो।

 आए  न  कभी  कोई,  मुसीबत  ही  कोई,

महफ़ूज़   हमेशा   ही,   दुआओं   में  रहो।

 ऐ  काश  मिले  तुम को, ज़माने की ख़ुशी,

लिखता  है  नवीं, सब की वफ़ाओं में रहो।


All rights reserved

 © प्रेमयाद कुमार नवीन (नवीं)

जिला - महासमुन्द (छत्तीसगढ़)  


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