STORYMIRROR

Dr. Anu Somayajula

Horror

4  

Dr. Anu Somayajula

Horror

बेनाम साए

बेनाम साए

1 min
284

रात आधी

जलती हुई अनगिनत आंखें

झांकती हैं खिड़कियों से

और अगले ही पल

तैरने लगते हैं चमगादड़ हवाओं में 


अंधेरे को चीरता रुदन दे जाता है

बर्फीली सिहरन

चांद के माथे कलंक सा

भेड़िया

खा गया है मेरे खरगोश को


उतर आते हैं धीरे धीरे धरती पर

बेनाम, लहराते साए

मानो अपने पंख

समेट लिए हैं चमगादड़ों ने।


   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Horror