Dr Jogender Singh(jogi)
Fantasy
बारिश से धुले, पेड़ पौधे,
सतरंगी होता आसमान।
भिगो देती तन मन,
टपकती बूंदे, टप टप।
शायद यह नज़ारा आएगा?
बैठ सीमेंट के जंगल में,
बेगानी /बेमानी चाह।
नींद
गुरु
कैसी दीपावली
आखिरी जेवर
सुबह
भुल्लन
खिड़की की जाल...
विस्तार
बेपनाह
दूर नहीं तू
वो क्या दिन थे जब मैं तुमको बस याद भर कर लेता था वो क्या दिन थे जब मैं तुमको बस याद भर कर लेता था
सुखी लकड़ी की तरह कहीं ख्वाब ना मेरे जल जाए सुखी लकड़ी की तरह कहीं ख्वाब ना मेरे जल जाए
अब हम तुम्हारे दिल मे उतरने लगे... अब हम खुद को आप से मिलाने लगे... अब हम तुम्हारे दिल मे उतरने लगे... अब हम खुद को आप से मिलाने लगे...
रंग फागुनी उमंग फागुनी संग लाया मधुमास।। रंग फागुनी उमंग फागुनी संग लाया मधुमास।।
तेरे क्षितिज ही जला रहे थे उस पर भोर सूर्य को फेरा तेरे क्षितिज ही जला रहे थे उस पर भोर सूर्य को फेरा
डोर के अदृश्य स्पर्श से अनुभूति की सिहरन होती है। डोर के अदृश्य स्पर्श से अनुभूति की सिहरन होती है।
कई प्रश्नों के जालों में फँसी कौन हूँ मैं? कभी ढूँढा है ख़ुद को? कई प्रश्नों के जालों में फँसी कौन हूँ मैं? कभी ढूँढा है ख़ुद को?
नव युग का दीप जलाए भय भ्रम अंधकार मिटाए। नव युग का दीप जलाए भय भ्रम अंधकार मिटाए।
हर तरफ से खुशियों के समाने का झरोखा था वो दुनिया इतनी खूबसूरत होगी, ऐसा न मैंने सोचा हर तरफ से खुशियों के समाने का झरोखा था वो दुनिया इतनी खूबसूरत होगी, ऐसा न मै...
क्योंकि जीवन के पल बीत ही जाते हैं उसके बाद आजीवन याद ही आते हैं। क्योंकि जीवन के पल बीत ही जाते हैं उसके बाद आजीवन याद ही आते हैं।
पैसे कोई लूट ले जाए, या ज्यादा पैसा घर आ जाए दुनिया कोई छोड़ के जाए, या नया मेहमान घर म पैसे कोई लूट ले जाए, या ज्यादा पैसा घर आ जाए दुनिया कोई छोड़ के जाए, या नया मे...
आसमान के सीने के धरातल को चीरता एक सूरज रोज सुबह उगे तो आसमान के सीने के धरातल को चीरता एक सूरज रोज सुबह उगे तो
नित्य कहता हूँ कड़वा है पर परमार्थ है, यहाँ हर रिश्ते की बुनियाद ही स्वार्थ है। नित्य कहता हूँ कड़वा है पर परमार्थ है, यहाँ हर रिश्ते की बुनियाद ही स्वार्थ ह...
जीवन पर्यंत सपना देखा विकास हो चहूँ ओर आया अवधि पंचवर्षीय जीवन पर्यंत सपना देखा विकास हो चहूँ ओर आया अवधि पंचवर्षीय
आकाशवाणी हुई, भीतर चले आइए, आकाशवाणी हुई, भीतर चले आइए,
चाहे-बिन चाहे जब कभी, फिक्र मन में घर कर जाती है, चाहे-बिन चाहे जब कभी, फिक्र मन में घर कर जाती है,
खुशियों के सितारे चुनरिया में पिरोकर पिया मिलन को घर से रात चल पड़ी है खुशियों के सितारे चुनरिया में पिरोकर पिया मिलन को घर से रात चल पड़ी है
खुशियों की होली आती है हर गम को दूर ले जाती है खुशियों की होली आती है हर गम को दूर ले जाती है
तेरी सूरत तेरे कानों की बाली मुझे दीवाना बना देती है तेरी सूरत तेरे कानों की बाली मुझे दीवाना बना देती है
मैं कोशिश करता हूँ हाँ, मैं कोशिश करता हूँ पढ़ने की तुझे पढ़ने की ! मैं कोशिश करता हूँ हाँ, मैं कोशिश करता हूँ पढ़ने की तुझे पढ़ने की !