बादलों के उस पार
बादलों के उस पार
सुना है -
बादलों के उस पार इक जहाँ है
केवल प्यार और अपनेपन वहाँ है
ना कोई भूखा सोता है
ना कोई मजबूर रोता है।
चलो फिर-
इक हौसलों को सीढ़ी बनाते हैं,
उन गुथियों को मिल सुलझाते हैं,
ना भाग्य को अब दोष देते हैं
ना भाग्यदाता को कोसते हैं।
मैं चला हूँ -
तुम भी मेरे पथगामी बन आओ
नेक रास्ते के सहभागी हो आओ
मंजिल नहीं दिखती पर रास्ता तो सामने है
आँखें खोल, बुलन्दी का आसमाँ तो सामने है।
