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Taj Mohammad

Tragedy Inspirational

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Taj Mohammad

Tragedy Inspirational

अश्क।

अश्क।

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अश्कों की कहानी हम तुम्हें क्या बतायें।

हो खुशी या गम ये तो दोनों में ही आयें।।1।।


हर अश्क की होती है इक ना इक दास्ताँ।

वरना बिन वजह के ये आंखों में ना आयें।।2।।


हर आंखों में होती हैं अश्कों की रवानियां।

होते नहीं है ये कम कितना भी बह जायें।।3।।


दिखते तो हैं अश्क बिल्कुल ही एक जैसे।

पर है ये कौन से ये उसी नजर को बतायें।।4।।


अश्कों का ना हो बसेरा वो आंखें ही नहीं।

है कहीं आंखें जो अश्कों बिन दिख जायें।।5।।


गर हैं दुआएं अश्कों में तो आहें भी तो हैं।

खुशी में आयें मोती वरना पानी बन जायें।।6।।


लगता है वो आंखें रोते-रोते ही सो गयीं हैं।

वरना रुख़सार पर ये निशां कहाँ से आयें।।7।।



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