STORYMIRROR

दयाल शरण

Romance

4  

दयाल शरण

Romance

अर्धांगिनी

अर्धांगिनी

1 min
475

किन लम्हों की यादें लेकर

फिर लौटी है सुनहरी धूप

शब्द वही थे अर्थ सुनाने

फिर लौटी है सुनहरी धूप।।


लिपे-पुते आंगन पे बिसरे

बिखरे रंगोली के रंग

अक्षद के रोली, कुम-कुम को

पावन कलश बनाती धूप।।


तुम भी खुद में खो जाओ

और मैं भी ख़ुद में खो जाऊं

इन सब मे हम दोनों को

फिर एक कराने आईं धूप।।


इक पल चन्दन की खुशबू

तो दूजे पल चंपा की खुशबू

दरवाजे के छोर से झांके

अदब से दबी-झुकी सी धूप।।


क्या खोया और क्या पाएंगे

सुबह से शाम के आगम तक

जितना भी शेष जीवन है

तुम संग बिताने आई धूप।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance