STORYMIRROR

Dr.Shilpi Srivastava

Romance

4  

Dr.Shilpi Srivastava

Romance

मुरझाया फूल

मुरझाया फूल

1 min
470

पुरानी डायरी के पन्नों को पलटा जो कल मैंने,

वहाँ मुरझा हुआ एक फूल मुस्काता नज़र आया,


जो पूछा मुस्कुराने की वजह क्या है बता दो तुम, 

वो अपनी बेबसी पे जोर से हँसता नज़र आया,


वो बोला अब नहीं मैं फिर से गुलशन को सजा सकता,

तुम्हारी इस हँसी पर अब नहीं ख़ुशबू लुटा सकता,


मगर फिर भी मुझे जब भी कभी तुम हाथ लेती हो,

तुम्हारी वो छुअन मैं आज भी बिसरा नहीं पाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance