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Kishan Negi

Tragedy Thriller

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Kishan Negi

Tragedy Thriller

अंधेरों से मोहब्बत हो गयी है

अंधेरों से मोहब्बत हो गयी है

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उजाले अब ज़िन्दगी को रास नहीं आते 

रोशनी के पल भी अब पास नहीं आते 

चौखट पर दिलजला दीया जला गया 

तूफ़ान की मेहरबानी आकर बुझा गया 

हाथों में चिराग लाना यहाँ सख्त मना है 

हमें अंधेरों से आज मोहब्बत हो गयी है 


इस शहर को इक चिराग नसीब नहीं है 

रौशनी में इंसान दिल के करीब नहीं है 

इक दिल जलाने से अँधेरा क्या दूर होगा 

जलाने वाला ही बुझाने को मजबूर होगा 

आफताब को कहना ज़रा परदे में रहना 

हमें अंधेरों से आज मोहब्बत हो गयी है 


अँधेरे सांय-सांय करके हवा करने लगे 

गहरे ज़ख़्म देकर फिर दवा करने लगे 

महलों में चैन से बैठे हैं दर्द बांटने वाले 

सुबह की इंतज़ार में हैं रात काटने वाले 

दर्द सो रहे हैं, कोई चिराग न जलाये अब 

हमें अंधेरों से आज मोहब्बत हो गयी है 


हमें रोशन करने की कोई बात न करना 

हथेली में चाँद लेकर, कोई रात न करना 

बिजलियाँ क्या चमकी, अँधेरे डरने लगे हैं 

बुझे अहसास तिल-तिल कर मरने लगे हैं 

इक सुकून मिलता है अँधेरी-अँधेरी रातों में

हमें अंधेरों से आज मोहब्बत हो गयी है



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