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निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

Drama

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निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

Drama

अक्ल समझदार हो गयी!

अक्ल समझदार हो गयी!

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मासूम अक्ल जब से समझदार हो गयी,

जिंदगानी मानों मँझधार हो गयी,

सजदे के खुलते हाथों और कीर्तन के

जुड़ते हाथों में फँसकर,

ईश-आराधना भी मानों व्यापार हो गयी !


जब से ये अक्ल समझदार हो गयी,

जाति धर्म के इन दंगों में,

सियासी कुर्सी के घातक रंगों में,

इंसानियत तार-तार हो गयी !


मासूम बचपन को कहाँ भनक थी,

दुआ मांगो तो अल्लाह सुनेगा,

और प्रार्थना से भगवान मिलेगा ,

सियासत के समझौतों में,

मासूमियत कहीं खाक हो गयी,


द्वेष राग की अग्नि में जल कर,

जिजीविषा लाचार हो गयी !


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