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Goldi Mishra

Drama Tragedy Classics

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Goldi Mishra

Drama Tragedy Classics

आशियाना

आशियाना

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आशियाना 

हम मुसाफ़िर है ज़िंदगी की इन राहों के,
मस्ताने है फिरदौस को पाने के,
चलते जाना है इन राहों में,
बनाना है फिर आशियाना इन राहों में,
सब शिकवे शिकायत इस मोड़ को दे जाते है,
हम साथ बस धूप और बरसाते ले जाते है,
बदलेंगे मौसम कई,
याद आएगी बीती बरसाते सभी,
नए आशियाने में भी झांकने ये धूप आएगी,
हवाएं फिर बहाने से दस्तक दे जाएगी,
मैने आहिस्ता डोरी ये थामी थी,
जो अब हाथों से फिसली जानी थी,
मैने परखा इन लकीरो को,
न जाने कल ने क्या ठानी थी,
मैने आज जिया था जी भर कर,
कल के भोर न जाने कब आनी थी,
अलविदा नहीं हम किस्से नए गाएंगे,
जब याद आएगी इन राहों की नंगे पांव दौड़े आयेंगे,
हम मुसाफ़िर है ज़िन्दगी की इन राहों के,
मस्ताने है फिरदौस को पाने के,

– गोल्डी मिश्रा 




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