STORYMIRROR

Goldi Mishra

Drama Classics Others

4  

Goldi Mishra

Drama Classics Others

खाली शाम

खाली शाम

1 min
18

खाली शाम

खाली कहां ये शाम आती,
मैने सुनी न कभी अनसुने वो गीत ले आती,
मद्धम आहटें सारा हाल कह जाती,
क्या देखूं मैं इस आसमाँ में,
शाम भीनी सी बिखरी है इस जहां में,
चंद चिल्लर वो साथ ले आई,
आज मानो गली में खुशी की बहार थी आई,
बल्ले से जड़े आज रशीद ने दो छक्के,
रामवीर चाचा की खिड़की के आज फिर शीशे थे टूटे,
शाम बस आई थी,
की चाची ने चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाई थी,
शाम तो बहाना था,
आज लुफ्त पकौड़ों का उठाना था,
इंतज़ार में कोई,
विदाई के विलाप में कोई,
इस शाम में अपनी अपनी धुन में हर कोई,
इतवार के नशे में मैं हूं,
और सोमवार के कौतुहल में वो है,
रात से मिलने की कसक,
शाम के एहसास का मुझपर एक अजीब सा असर,
रुक जाती ये शाम अगर मैं कह देती,
उसे इस ओर आने को मैं कह देती,
मेरी किताब का वो पन्ना आज भी अधूरा है,
पन्ना वो आज भी न जाने किधर खोया है,
रुक जाए ये शाम तो बोल उस गीत के सुना दूँ,
सारी रात बस इसी सुध में बीता दूं,

– गोल्डी मिश्रा 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama