STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

फिर कब मिलेंगे?

फिर कब मिलेंगे?

1 min
21

ये सुंदर मौसम और ये हसीन नज़ारा,

हमने गाया था यहाँ प्यार भरा तराना,

ये मधुर पलों को मैं भूल सकता नहीं,

फिर कब मिलूंगा यह कह सकता नहीं।


ये तेरा सितारों की तरह चमकता चेहरा,

तेरे नैनों से ज़ाम छलकता था सुनहरा,

ये छलकते ज़ाम को मैं भूल पाऊंगा नहीं,

फिर कब मिलूंगा यह कह सकता नहीं।


ये सावन की घटा में हमारा प्यार करना,

तुझे बांहों में सिमटकर मदहोशी में डुबाना,

ये मधुर मिलन को मैं भूल पाऊंगा नहीं,

फिर कब मिलूंगा यह कह सकता नहीं।


ये शरद की रात में तुझको मिलने आना,

मेरी "मुरली" की धुन में तुझे मग्न बनाना,

ये प्यार की धुन को मैं भूल पाऊंगा नहीं,

फिर कब मिलूंगा यह कह सकता नहीं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama