STORYMIRROR

ख़रीदी

ख़रीदी

1 min
14K


आज वीराने दिल को

बागबान करने निकला हूँ,

दहकती धूप में

ठंडी छाँव ढूंढने निकला हूँ,

तरस रहा हूँ कि

कोई मुझे भी गले लगा ले

कुछ देर के लिए,

इसीलिए गुलाबी नोटों से

झूठा प्यार खरीदने निकला हूँ,...!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama