अभी रहने दो
अभी रहने दो
अभी रहने दो
क्यारी में बिखरी ये चांदनी,
इसे थोड़ी देर यहीं रहने दो,
मुझमें मेरी एक कमी,
उसे जीवित रहने दो,
काम काज की फुर्सत में,
राहत को पल दो पल रहने दो,
मैं जो आज लिखता हूं तुम्हे,
उसे सवाल ही रहने दो,
कभी हासिल न जो मुझे,
उसे मेरी ख्वाब में मेरा रहने दो,
तुम से हम तक की दूरी को,
फिलहाल मुझे लिखने दो,
शायर न सही मैं आज,
मुझे कल का फकीर रहने दो,
हाल मैं अपना क्या लिखूं,
कुछ बाते मुलाकात के लिए रहने दो,
तुम पूछो और मैं न बोलूं कुछ,
इस झिझक को पहले मिटने दो,
– गोल्डी मिश्रा

