STORYMIRROR

Goldi Mishra

Drama Romance

4  

Goldi Mishra

Drama Romance

कुछ तो,

कुछ तो,

1 min
15


कुछ तो,

मैं आज को लिख,
बात कल की कह गई,
सुध में थी न मैं
और हर बात लिख गई,
लिबास और छींट को लिख दिया,
मैंने बिस्तर और सिलवटों को लिख दिया,
गुलाब के इतर को लिख दिया,
उसकी बाकी महक को लिख दिया,
कुछ तो था उस शाम में,
मैने बिना मयखाने गए शराब को लिख दिया,
तुम तक जाते उस रास्ते की लिख दिया,
छूटते साथ और पल भर की मुलाकात को लिख दिया,
मिटते काजल और फिसलते आंचल को लिख दिया,
शाम जो मेरी न थी उसे अपना लिख दिया,
बेसब्री को मैने इत्मीना से लिख दिया,
सब लिख कर मैने वो पन्ना कहीं खो दिया,

– गोल्डी मिश्रा 




ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Goldi Mishra

खाली शाम

खाली शाम

1 min വായിക്കുക

आशियाना

आशियाना

1 min വായിക്കുക

मकान

मकान

1 min വായിക്കുക

उधारी

उधारी

1 min വായിക്കുക

कुछ तो,

कुछ तो,

1 min വായിക്കുക

स्वलेख

स्वलेख

1 min വായിക്കുക

झरोखें

झरोखें

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Drama