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Meena Sharma

Drama

4.6  

Meena Sharma

Drama

दूर के ढोल सुहावने

दूर के ढोल सुहावने

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दूर के ढोल सुहाने

लगते हैं

पास आने पर डराने

लगते हैं।


जिद ना करना

सितारों को कभी छूने की

आसमां के फूल

हाथ नहीं महकाते

उनको सहलाओ तो वे

हाथ जलाने लगते हैं।


वक्त गर साथ दे,

चूहा भी शेर होता है

गुरुघंटाल भी गुरुओं को

सिखाने लगते हैं।


खिले फूल लगते हैं

सब को प्यारे,

फेंक दिए जाते हैं वे, जब

मुरझाने लगते हैं।


इक नया रूप निकलता है

यहाँ पर्त-दर-पर्त !

हर एक चेहरे को मुखौटे

लगाने पड़ते हैं।


महल विश्वास का

ढह जाता है पल दो पल में

जिसकी बुनियाद ही रखने में

जमाने लगते हैं।


खाली घड़े इतराने लगते हैं

आधा भरते ही,

छलकने छलछलाने लगते हैं।


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