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Goldi Mishra

Drama Tragedy

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Goldi Mishra

Drama Tragedy

मकान

मकान

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मकान 

ये ईंट ये दरवाज़े,
इसे मकान रहने दो,
घर की खोज में निकले को,
खोया ही रहने दो,
विलुप्त वो नहीं,
ठहरा वो अभी नहीं,
कामयाब न सही,
कुछ सलीके कुछ सबक ही सही,
एक सफ़र तो हासिल होगा,
एक ख्वाब नया फिर होगा,
अभी साहस नहीं कि ईंटों को मैं टटोलुं,
इन दीवारों से आखिर कितना ही कह दूं,
बाग बिन क्यारी के थे,
इस मकान में सबक कई थे,
रात के सवेरे न थे,
कल के कोई ज़िक्र न थे,
इन्हीं किन्तु से घिरा,
वो मकान छोड़ चला,
अपने आप से भगता,
न जाने वो किस ओर चला,
अभी निकला है वो जवाब कि आस में,
चला है वो घर की तलाश में,

– गोल्डी मिश्रा 




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