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Kanchan Prabha

Fantasy Inspirational


4.8  

Kanchan Prabha

Fantasy Inspirational


आज प्रकृति आजाद है

आज प्रकृति आजाद है

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ओस की नन्ही बूंदों का पत्तों पर गिरना अच्छा है

धरती पर इस तूफान के धूल का उड़ना अच्छा है

मानव ने दी बहुत यातना प्रकृति के कोमलता को

उलटी दिशा में अब तो हर नदियों का मुड़ना अच्छा है

यही इसका अंदाज है 

आज प्रकृति आजाद है


थोड़ी सी तो लाज बचा लो धरती के प्रकोप से

तीव्र तेज में जल ना जाओ, तुम इस पीले धूप से

घोर घटा ये सावन की, पर कंपन हृदय की तेज हुई

बचना मुश्किल हो ना जाये, मौसम के रौद्र रूप से

विनाश का ही आगाज है 

आज प्रकृति आजाद है


कितने मीठे मीठे लगते पंछी चिड़ियों के ये कलरव

आओ हरियाली बनाये धरती को हम सब मिलकर 

धरती पर उतर एक दिन कोई परी मोहित हो कर 

देखे इतनी सुन्दर धरती गाँव शहर सब हर्षित हो कर 

धरा की यही आवाज है 

आज प्रकृति आजाद है


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