STORYMIRROR

आईना

आईना

1 min
671


तुम आईना हो

तुममें मैं अपना प्रतिबिंब पाती हूँ

मगर मैं भी हूँ पानी,


घोल दो विष, कर दो कसैला

या मीश्री सी मिठास छान दो

मैं घुल जाती हूँ।


बहा दो मुझे समुंदर में

या भर दो सुराही में

मैं ढल जाती हूँ।


रंग दो पीला, हरा, जामुनी

या श्यामवर्ण कर दो मुझे

मैं रंग जाती हूँ।


मगर तुम आईना हो

तुममें मैं

अपना प्रतिबिंब पाती हूँ।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance