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Archana Tiwary

Abstract

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Archana Tiwary

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दूसरी दुनिया

दूसरी दुनिया

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बात बीस साल पहले की है। जब मेरे दादा जी की तबीयत बहुत खराब हो गई थी। तब उनकी उम्र लगभग पचासी वर्ष की थी। मेरे दादाजी शहर के जाने-माने डॉक्टर्स में गिने जाते थे। इस उम्र में भी वो अपना बहुत ध्यान रखते थे, पर इस बार तो उनकी ऐसी हालत देखकर हम सब ने उनके बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी।


आसपास के लोगों को जब उनकी तबीयत के बारे में पता चला तो हर दिन शाम में उनके दोस्त उनसे मिलने आया करते थे। उनसे बातें कर दादाजी का मन हल्का हो जाता। बीमारी और बढ़ती उम्र के कारण वे काफी कमजोर हो गए थे और अब तो बातें भी कम करने लगे थे।  सुबह उठकर हम लोगों ने देखा वे किसी बात पर कोई प्रतिक्रिया न दे रहे थे। मैं छोटी थी इसलिए मुझे कुछ समझ में न आया पर पास ही खड़े चाचा जी ने कहा- अब दादाजी जीवित नहीं रहे। उनकी सांसे बंद हो गई है। श्मशान घाट ले जाने के लिए उनकी अर्थी सजाई गई ।अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया।  उन्होंने अपने दोस्तों का और कई जरूरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज किया था इसलिए लोगों के दिल में उनके लिए बड़ी सहानुभूति थी। आए हुए लोगों में उनके एक मित्र की ठीक उसी समय तबीयत बहुत खराब हो गई। वह दादा जी को देखने के बाद तुरंत अपने घर चले गए।  इधर दादा जी को ले जाने की तैयारी होने लगी होने लगी, तभी अचानक वह उठ कर बैठ गए। उठने के साथ ही आसपास देखते हुए उन्होंने पूछा-" मुझे कहां ले जा रहे हो, इतने सारे लोग यहां क्यों इकट्ठा हुए हैं"? अर्थी से उठकर पास रखें बिस्तर पर वे बैठ गए। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो बहुत गहरी नींद से जागे हों।  तभी एक पड़ोसी ने आकर उनके उस दोस्त की मौत की खबर दी जिस की तबीयत थोड़ी देर पहले खराब हो गई थी। हम सब दादा जी जीवित देख खुश होकर चारों तरफ से उन्हें घेर उनसे पूछने लगे-" दादा जी आप कहां चले गए थे, आपको क्या-क्या अनुभव हो रहा था?" उन्होंने कहा- मैं तो सो रहा था तभी एक दिव्य पुरुष मेरे पास आए और मुझे अपने साथ ले निकल पड़े। मैं जहाँ पहुँचा वहां चारों तरफ रंग बिरंगे फूल खिले थे । पास ही एक झरना था और एक नदी बह रही थी । फूलों की सुगंध चारों तरफ फैली थी। बड़ा ही मनमोहक दृश्य था।  जिनके साथ मैं वहां गया था वहां पर उसके जैसे ही कई दिव्य पुरुष आसपास घूम रहे थे। उनमें से एक ने उसे डांटते हुए कहा-" इन्हें क्यों ले आए हो, अभी इन्हें नहीं लाना था, इन्हें वापस उस दुनिया में ले जाओ और उनके पड़ोस में जो इनका दोस्त है उन्हें लेकर आओ।" उनका इतना कहना था कि मेरी नींद खुल गई। मैं जब जगा तो यहां अपने आप को इस अर्थी पर पायाऔर अभी अभी मेरे दोस्त के मौत की खबर आयी। उनकी बातें सुन हम सब को विश्वास न हो रहा था पर यह कोई कहानी न थी, हकीकत थी। जो अभी-अभी दादा जी के साथ घटी थी।  उसके बाद मैंने ये मान लिया कि सच ही कहा गया है इस दुनिया से अलग एक दुनिया है जहां मृत्यु के बाद सबको अकेले ही यात्रा करनी पड़ती है । किस्से कहानियों में स्वर्ग नरक की जो बात कही गई है उसमें सच्चाई का आभास उस दिन हम सबको हो गया था। इस घटना के चार साल बाद तक मेरे दादाजी स्वस्थ और जीवित रहे। जब भी अपने साथ हुई इस घटना का जिक्र वो करते तो उनकी आंखें नम हो जाती। आखिर थी भी तो यह एक अविश्वसनीय घटना!


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