STORYMIRROR

रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy Action Crime

3  

रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy Action Crime

ख़तरे में चौथा स्तंभ

ख़तरे में चौथा स्तंभ

1 min
232

जग का अजब हुआ है हाल।

सच का जग में पड़ा अकाल।

दिखलाता दिन-रात सभी को-

सच पर झूठ का पर्दा डाल।


क्यों सच इतना मुंहचोर हुआ।

क्यों ग़लत झूठ का शोर हुआ।

चौथा पाया इस लोकतंत्र का-

क्यों आज इतना कमजोर हुआ।


कुछ होता और कुछ दिखता है।

हर ख़बर यहां अब बिकता है।

बस झूठी सच्ची बात बना कर-

दिखलाता है और लिखता है।


हर ख़बर यहां व्यापार करें।

छुप छुप कर घातक वार करें।

धोखेबाजी जनता के संग -

हर टीवी और अखबार करें।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy