Deepika Kumari

Abstract Thriller Tragedy


4.8  

Deepika Kumari

Abstract Thriller Tragedy


उड़ान

उड़ान

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आज वह बहुत खुश थी। वह बादलों के बीच एक चिड़िया की तरह उड़ती जा रही थी। जहां तक उसकी नजर जाती वह अपने आप को बादलों से घिरा पाती । मानो वह पृथ्वी से सीधा स्वर्ग में आ गई हो। ऊपर से जब नीचे की ओर देखती तो कुछ भी नजर ना आता , मानो धरती कहीं है ही नहीं। अगर कुछ है तो वह है सिर्फ बादल! सफेद रुई से कोमल बादल। आज यह उसके जीवन की पहली उड़ान थी। बचपन के पायलट बनने का उसका सपना आज पूरा हो गया था । आज का दिन उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन था।

घर आकर जब उसने अपनी नौकरी के पहले दिन का अनुभव अपने घर वालों को बताया तो उसके साथ साथ मानो अपनी कल्पनाओं से वे भी उसकी पहली उड़ान का हिस्सा बन गए हो। अगली सुबह वह दुगने जोश और उत्साह के साथ अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए तैयार ही हो रही थी कि उसके पापा दौड़ते हुए उसके पास आते हैं और कहते हैं कि ,"कल तेरी बातों में हम समाचार सुनना भी भूल गए। प्रधानमंत्री ने कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के कारण पूरे देश को 21 दिन के लिए पूरी तरह से लॉक डाउन कर दिया है। सभी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी स्थगित कर दी गई हैं। यह सुनते ही उसके पैरों तले से जमीन खिसक जाती है और वह मायूस होकर एक कुर्सी पर बैठ जाती है। उसकी यह हालत देख कर उसके पिता उससे कहते हैं कि," खुशी बेटा सिर्फ 21 दिन की ही तो बात है, तुझे नौकरी से थोड़ी ना निकाला गया है जो इस तरह से उदास हो रही है। " उसके पायलट बनने के सपने को पूरा करने के लिए उसके पिता ने भी जी जान लगा दी थी। आज जब उसका सपना पूरा हुआ था तो इन कुछ दिनों के विराम से कोई भी खुश नहीं था।

खुशी के लिए 21 दिन मानो 21 साल हो गए हो। वह एक-एक दिन गिन गिन कर काटने लगी।

21 वे दिन की शाम को सब टीवी के आगे बैठे थे और देश के प्रधानमंत्री का संदेश सुन रहे थे।देश के प्रधानमंत्री जनता को संबोधित करते हुए कहते हैं कि कोरोना वायरस के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए लाकडाउन 15 दिन के लिए फिर से बढ़ाया जाता है। यह सुनकर खुशी के चेहरे पर जो उम्मीद की किरण आज नजर आई थी वह फिर से कहीं खो जाती है और वह फिर से अपनी तन्हाई से घिर जाती है। उसके पिता से उसका मायूस चेहरा देखा नहीं जाता। वे कहते हैं ,"बहुत दिन हो गए हम कहीं बाहर नहीं गए ‌। कल सुबह हम सब मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर पार्क में जाएंगे, इसी बहाने बाहर की ताजी हवा भी खाने को मिलेगी।"

खुशी की मां उन्हें रोकते हुए कहती हैं कि ," बाहर खतरा है जाना ठीक नहीं होगा।"

पर खुशी के पिता को खुशी के चेहरे पर मुस्कान लाने की जिद उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर कर देती है। वह कहते हैं कि,"राजस्थान में कोरोना नहीं है और हमारे मोहल्ले में तो अभी तक एक भी केस नहीं मिला है। कोई खतरा नहीं है सब कल सुबह जल्दी उठ जाना।"

अगली सुबह सब तैयार हो जाते हैं। बाहर जाकर खुली हवा में सांस लेकर सब राहत महसूस करते हैं। वहां खुशी की सहेली(अंजलि) भी उसे मिलती है। उसे देख कर वह बहुत खुश हो जाती है। उसे खुश देख कर उसके पिता के दिल को कुछ सुकून मिलता है। खुशी की सहेली अंजलि उसे अपनी घड़ी दिखाती है जो उसके भाई(विजय) ने अपने दोस्त(राहुल) से विदेश से मंगाई थी। राहुल लाकडाउन से एक दिन पहले ही विदेश से लौट कर आया था। राहुल के माता-पिता की तबीयत ठीक नहीं थी इसीलिए विजय उनसे मिलने के लिए हॉस्पिटल गया था।

अंजली खुशी से कहती है,"कल भैया, मेरे लिए ये घड़ी अपने दोस्त से लाए है। खुशी उसे देख कर खुश होती है और अंजलि को अपनी पहली उड़ान का अनुभव बता कर एक बार फिर से अपने उस अनुभव को जी लेती है। कुछ देर बाद सब अपने घर लौट जाते हैं।

खुशी लाकडाउन खत्म होने का फिर से इंतजार करने लगती है कि अचानक उसे महसूस होता है कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उसे खांसी ज़ुकाम के साथ बुखार भी हो जाता है। उसके पिता उसे हॉस्पिटल ले जाते हैं। वहां जांच में पता चलता है कि खुशी कोरोना पॉजिटिव है। उसे वही हॉस्पिटल में एडमिट कर लिया जाता है और उसके परिवार के सभी सदस्यों को भी क्वारणटीन कर दिया जाता है। उसके पिता द्वारा उसके चेहरे पर लाई गई एक मुस्कान की कोशिश उसकी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।

खुशी हॉस्पिटल में बिस्तर पर सो रही है और सपना देख रही है कि वह अपने विमान में बैठी है और आसमान में जोर-जोर से बिजलियां कड़क रही हैं। तूफान उसके विमान को मानो पूरी ताकत से नीचे गिराने की कोशिश कर रहा है। उसे अपने विमान के बाहर चारों ओर अंधकार नजर आता है। उसका विमान डगमगाता हुआ नीचे कि और गिर रहा है और एक विस्फोट के साथ सब खत्म हो जाता है। उसके इसी सपने के साथ उसकी आखरी सांस उसके शरीर का साथ छोड़ देती है और उसकी पहली उड़ान ही उसके जीवन की आखिरी उड़ान बन जाती है।


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