Deepika Kumari

Drama Horror


4.7  

Deepika Kumari

Drama Horror


मनहूस सड़क

मनहूस सड़क

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विनय की मित्र मंडली में पांच दोस्त थे। साहिल, विक्की, मोहित, अरुण, योगेश इन सभी की दोस्ती बहुत गहरी थी। कॉलेज की दोस्ती कब इतनी गहरी हो जाएगी, किसी को नहीं पता था। कुछ सालों बाद विनय को अमेरिका में नौकरी मिल जाती है और विनय के दोस्त उससे दूर हो जाते हैं।विनय को अमेरिका में रहते हुए 1 साल हो जाता है। एक दिन विनय अपने दोस्तों के पास फोन करता है और उन सभी को अमेरिका घूमने के लिए बुलाता है विनय के सभी दोस्त उसके पास जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। और पहुंच जाते हैं विनय के पास अमेरिका।

साहिल अमेरिका के प्रसिद्ध स्थलों को गूगल पर सर्च करने लगता है और अगले ही दिन से सभी निकल पड़ते हैं घूमने के लिए। घूमते घूमते शाम हो जाती है लेकिन उनका होटल अभी दूर होता है। अरुण कार चला रहा होता है और बताता है कि," कार में ज्यादा गैस नहीं बची है। पता नहीं हम होटल तक पहुंच पाएंगे भी कि नहीं।

मोहित, "तो कार साइड में लगा, मैं होटल तक पहुंचने का कोई शॉर्टकट ढूंढता हूं। शॉर्टकट से होटल जल्दी पहुंच जाएंगे। यह रास्ता बहुत लंबा है। "

विक्की, " देख मैंने तुझसे पहले शॉर्टकट ढूंढ लिया।यहां से आगे जाकर लेफ्ट लेना सड़क नंबर 666 पर यह हमारे 45 मिनट के रास्ते को 15 मिनट में कवर कर देगी, ऐसा दिखा रहा है गूगल।"

विक्की की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि विनय बीच में ही बोल पड़ता है, "तुम्हारा दिमाग तो ठीक है। उस रास्ते से जाने का सोच भी मत लेना। वहां गए तो होटल की जगह जहन्नुम पहुंच जाओगे। मुझे नहीं मरना अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई।" सभी दोस्त विनय की बात सुनकर ठहाका मारकर हंस देते हैं।

मोहित, " अबे तो हमारी कौन सी शादी हो गई है। और किस दुनिया की बातें कर रहा है तू अमेरिका जैसे देश में रहकर। यह इंडिया नहीं है पागल। यहां तो अंधविश्वास पर मत चल।"

विनय, "अरे नहीं यार तुम यहां अभी नए हो। ‌मुझे 1 साल हो गया है। मैंने इस सड़क के बारे में बहुत सुना है।यहां के लोग इसे 'डेवील्स हाईवे' कहते हैं। एक बार तो न्यूज़ में भी दिखा रहे थे कि इस सड़क पर जाने वाली गाड़ियां पता नहीं कहां गायब हो जाती हैं और सबसे अधिक एक्सीडेंट भी इसी सड़क पर होते हैं।"

योगेश, "अरुण गाड़ी स्टार्ट कर। अब तो हम इसी सड़क से जाएंगे। जरा हम भी तो देखें कि वे गाड़ियां कहां गई और कैसे यहां बिना बात ही एक्सीडेंट हो जाते हैं।"

विनय के बहुत समझाने के बाद भी उसके दोस्त उसी सड़क की ओर चल देते हैं। विनय, "अरे यार, क्यों बेकार में खतरा मोल ले रहे हो।उसी रूट से ले चलो बीच में पेट्रोल पंप पड़ता है। वहीं से गैस भरवा लेंगे। यहां सच में खतरा है। सरकार भी मान चुकी है कि इस सड़क पर बहुत ज्यादा हादसे होते हैं। कहते हैं शायद इस सड़क का नंबर ही मनहूस है। इसे बदलने पर भी विचार चल रहा है। तुम क्यों आ बैल मुझे मार वाली कहावत को सिद्ध करने पर तुले हो।"

विक्की, " नहीं विनय, आ बैल मुझे मार नहीं। आ चुड़ैल मुझे मार।" सब फिर हंस पड़ते हैं।

शाम ढल जाती है और अंधेरा घना होता जाता है। सड़क के दोनों और घने जंगल हैं चिड़ियों की आवाज भी भयावह सी लगने लगती है। विनय, " अरुण, देख इस सड़क पर हमारे अलावा कोई और नजर आ रहा है तुझे? नहीं ना, क्योंकि यह सड़क सच में मनहूस है। अभी भी कहता हूं घूमा ले गाड़ी।

योगेश, " नहीं अरुण, शेर झुंड में नहीं चलता। वह अकेला ही निकलता है शिकार पर। और हम तो फिर भी पांच हैं कुछ नहीं होगा। विनय यह सब दक़ियानूसी बातें हैं। तू तो इतना मॉडर्न है, तू कब से इन बातों पर विश्वास करने लगा। कमॉन, बी प्रैक्टिकल।"

अरूण मध्यम गति से कार चला रहा होता है कि अचानक उसकी कार सड़क पर बहुत तेज गति से दौड़ने लगती है। अचानक से स्पीड बढ़ने के कारण सभी दोस्त पीछे की और अपनी सीट पर गिर पड़ते हैं और अरुण से कहने लगते हैं, "अरुण, कार की स्पीड कम कर।अचानक से इतनी तेज क्यों कर दी।"

अरुण कार को संभालने की कोशिश करता है कि अचानक जोर से झटके के साथ उसकी कार रुक जाती है। तेज गति से चलती हुई कार के अचानक रुक जाने के कारण सभी को चोटें आती हैं। अरूण का सिर कार के स्टेरिंग से टकराने के कारण वह बेहोश हो जाता है और उसके सिर से खून निकलने लगता है। सभी दोस्त खुद को संभालते हैं और अरुण को पीछे की सीट पर बिठा देते हैं और विनय गाड़ी चलाने के लिए आगे बैठता है।विनय, " मैंने कहा था, इस सड़क पर हादसे होते हैं। पर तुम मेरी एक नहीं सुनते।"

विनय गाड़ी स्टार्ट करता है पर गाड़ी स्टार्ट नहीं होती। बहुत कोशिश करने के बाद भी गाड़ी स्टार्ट नहीं होती कि अचानक उन्हें ऐसा महसूस होता है कि पीछे से बहुत तेज स्पीड से कोई ट्रक उन्हीं की ओर आ रहा है। विनय डर जाता है और भगवान का नाम लेकर कार स्टार्ट करने की फिर कोशिश करता है। इस बार कार स्टार्ट हो जाती है। सभी पीछे मुड़कर देखते हैं तो वहां कोई नहीं होता। बस ट्रक के उनके पीछे आने की आवाज आती है। विनय इधर-उधर देखे बिना हनुमान चालीसा पढ़ते हुए कार चलाने लगता है और 10 मिनट बाद ही वह मेन रोड पर आ जाता है। मेन रोड पर गाड़ी और लोगों को आता जाता देख उसकी सांस में सांस आती है। 15 मिनट में ही वे होटल पहुंच जाते हैं और दूसरी कार से अरुण को हॉस्पिटल ले जाते हैं। पट्टी के बाद अरुण को होश आ जाता है और सभी दोस्त होटल पहुंच जाते हैं। सभी विनय को सॉरी बोलते हुए कहते हैं कि, " हमें तेरी बात मान लेनी चाहिए थी यार। वहां कुछ तो था।"

अरूण, " पता नहीं गाड़ी की स्पीड अचानक कैसे बढ़ गई थी। मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने गाड़ी अपने हाथ में ले ली हो और कार मैं नहीं कोई और चला रहा हो।"

मोहित, " और वह ट्रक की आवाज ऐसा लग रहा था बिल्कुल कार के पीछे ही है और अभी कार पर चढ़ ही जाएगा। लेकिन पीछे देखने पर रोड खाली होता था।"

साहिल, " हां, हम अब समझे वहां हादसे कैसे होते होंगे।यह तो नहीं पता क्या है पर कुछ तो है वहां।"

विनय, "भगवान का शुक्र है हम सब बच गए और सही सलामत वापस आ गए। तुम में से अगर किसी को कुछ भी हो जाता तो मैं तुम्हारे मां बाप को क्या जवाब देता।" विनय की बात सुनकर सभी मुस्कुरा देते हैं।


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