Deepika Kumari

Abstract


4.5  

Deepika Kumari

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ये दूरी है जरूरी

ये दूरी है जरूरी

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"कहां जा रही हो ?" प्रिया की मां प्रिया से पूछती है।

प्रिया, " मेरी सहेली के घर।"

मां, " क्यों ? ऐसा क्या जरूरी काम आ गया जो तुम्हें उसके घर जाना पड़ रहा है।"

प्रिया, " आज उसका जन्मदिन है ना। आपको पता है ना वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है।"

मां ,"और तुम्हें पता है ना कोरोना कितनी खतरनाक बीमारी है। कितने लोग रोज इससे संक्रमित हो रहे हैं, कितने रोज मर रहे हैं। सरकार ने लॉक डाउन खत्म कर दिया इसका यह मतलब नहीं कि खतरा खत्म हो गया।सरकार ने जो करना था वह कर लिया , अब हमें जिंदा रहना है तो हमें ही अपना ख्याल रखना होगा। घर से बाहर तभी निकलो जब बहुत जरूरी काम हो। जन्मदिन की पार्टी जरूरी काम नहीं है।"

प्रिया, "ओहो मां, आप चिंता मत करो, देखो मैंने मास्क पहन लिया है और सैनिटाइजर भी ले लिया है। मैं वहां सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखूंगी और मेरी इम्यूनिटी भी काफी स्ट्रांग है।चिंता मत करो।" यह कहते हुए प्रिया निकल जाती है और रात को 11:00 बजे घर वापस आती है।

प्रिया की मां, " यह कौन सा वक्त है घर आने का। इतना लंबा जन्मदिन? केक काटने में क्या 4 घंटे लगते हैं?" प्रिया , "अरे इतने महीनों बाद तो सब दोस्त मिले हैं। इतनी सारी बातें इकट्ठा हो गई थी करने के लिए कि समय का पता ही नहीं चला।"

मां, " वह सब तो ठीक है पर दूरी बनाए रखी की नहीं। और लाओ केक ! मैंने कहा था वहां ना कुछ खाना ना हीं पीना ,‌‌ घर आकर ही खाना खाना। चलो मुंह हाथ धो लो मैं खाना लगा देती हूं।"

प्रिया, " सॉरी मां, आज उसी ने पार्टी दी थी तो हम सबने वही खाना खा लिया।"

मां , "सत्यानाश ! हे भगवान तू खुद तो मरेगी ही और साथ में हम सब को लेकर मरेगी।"

प्रिया , "अरे मां, सभी खा रहे थे तो फिर मैं क्या करती? मैंने तो मना भी किया था पर किसी ने एक न सुनी और खाना खिला ही दिया।"

अगली सुबह प्रिया की एक और सहेली प्रिया के घर की बेल बजाती है।

प्रिया की मां दरवाजा खोलती है , "अरे मोनिका, तुम !आओ बेटा , अंदर आओ।"

मोनिका , "नहीं आंटी, कोरोना को सोशल डिस्टेंसिग से ही हराया जा सकता है इसीलिए मैं अंदर नहीं आऊंगी। मैं तो बस प्रिया को बताने आई थी कि कल से हमारी ऑनलाइन क्लासेस शुरू होने वाली हैं। वह अपने फोन में मैडम का नंबर सेव कर लेगी और मैडम को उसका कौन सा नंबर दूं, यही पूछने आई थी। "

प्रिया की मां, " ठीक है बेटा , मैं उससे पूछ कर बताती हूं।"

प्रिया दरवाजे पर आती है, " अरे मोनिका ! आओ, तुम कल पार्टी में क्यों नहीं आई ?"

मोनिका, " नहीं, क्या तुम्हें नहीं पता कोरोना को हराने का एक ही उपाय है सोशल डिस्टेंसिंग। जब तक बहुत ज्यादा जरूरी काम ना हो, घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और ऐसी पार्टी में जाने का क्या फायदा जो हमारे और हमारे परिवार वालों की जान को ही खतरे में डाल दे।"

प्रिया, " तुम ठीक कहती हो। मैंने भी कल पार्टी में जा कर बहुत बड़ी गलती कर दी। अब मुझे टेंशन हो रही है अब मैं क्या करूं? कहीं मेरे कारण मेरे घर वालों को भी कोरोना ना हो जाए।"

मोनिका , "तुम एक काम कर सकती हो। 15 दिन के लिए खुद को एक कमरे में क्वॉरेंटाइन कर लो। अगर तुम्हें इंफेक्शन हुआ होगा तो 15 दिनों में इसके लक्षण आ जाएंगे। इससे तुम अपने घर वालों को बचा सकोगे। यदि इन 15 दिनों में कुछ नहीं हुआ तो सब ठीक है।"

प्रिया , "ठीक है मैं ऐसा ही करूंगी।" प्रिया सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए खुद को एक कमरे में कैद कर लेती है। 7 दिन बाद उसे पता चलता है कि उस पार्टी में आई उसकी सभी फ्रेंड्स कोरोना पॉजिटिव मिली है और आज उसकी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही थी। वह हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके सब बताती है। उसका टेस्ट होता है और वह भी कोरोना पॉजिटिव होती है। कुछ दिन के इलाज के बाद वह ठीक हो जाती है और सोशल डिस्टेंसिग के कारण उसके परिवार के सभी सदस्य भी बच जाते हैं। लेकिन उसकी बाकी फ्रेंड्स ऐसा नहीं करती और सभी के घरों में किसी ना किसी की मौत हो जाती है।

प्रिया मोनिका के पास फोन करती है और कहती है, "थैंक्यू यार अगर तू उस दिन नहीं आती और मुझे quarantine होने के लिए नहीं कहती तो शायद मैं भी आज मेरे परिवार के सदस्यों को खो चुकी होती।"


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