Kamini sajal Soni

Abstract


4.7  

Kamini sajal Soni

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सहयोग की भावना

सहयोग की भावना

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शादी के बाद शालिनी को ससुराल में खाना बनाने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा । क्योंकि शालिनी के मायके में लहसुन और प्याज नहीं खाया जाता था ....सिर्फ और सिर्फ सात्विक भोजन तथा पूर्णतया अध्यात्मिक माहौल था।

लेकिन ससुराल में बिल्कुल विपरीत माहौल तेज मिर्च मसाले वाला और लहसुन प्याज वाला खाना खाया जाता था।

अब जब भी शालिनी खाना बनाती तो वह इसी में कंफ्यूज हो जाती की कितना लहसुन डालूं और कितनी प्याज उसको इसका कोई आईडिया नहीं बैठता। सासू मां सदैव ताना देने के लिए तत्पर रहती कि घास फूस वाला खाना बनाना बस आता है।

पर शालिनी के पति सौरभ बहुत ही सुलझे सकारात्मक सोच वाले थे उन्होंने शालिनी को अपने घर के अनुसार खाना बनाने मैं बहुत हेल्प की हर रेसिपी में पूरा गाइड करते धीरे-धीरे शालिनी लहसुन प्याज वाला खाना बनाने में भी सुघड़ होते चली गई।

शालिनी ने बहुत ही जल्दी सब कुछ सीख लिया और पूरी तरह से ससुराल के माहौल में रच बस गई।

अब नवरात्रि के समय जब हर घर में माता विराजती हैं तथा घर घर में मां की पूजा आराधना की जाती है ऐसे समय में हर घर का माहौल सात्विक हो जाता है।

शालिनी के ससुराल में भी 9 दिन तक लहसुन प्याज का खाना नहीं बनता और ऐसे समय में सासु मां के हाथ पर फूल जाते थे। क्योंकि सादा खाना बनाना उनको बिल्कुल भी नहीं आता । और शालिनी तो इस सब में निपुण थी क्योंकि बचपन से ऐसे ही माहौल में उसकी परवरिश हुई थी।

अब रोज शालिनी 9 दिन तक बदल बदल कर फलाहार और बिना लहसुन प्याज के स्वादिष्ट भोजन तैयार करती सभी अपनी उंगलियां चाटते हुए रह जाते। अपने आप को सिद्ध करने का इससे अच्छा मौका भला वो कैसे गंवा सकती थी ।

एक दिन जब शालिनी के ससुर उसकी बहुत तारीफ कर रहे थे तब हंसते हुए शालिनी ने सासू मां से बोला मां हम घास फूस खाने वाले भी स्वादिष्ट खाना खाना जानते हैं। यह सुनकर सासू मां अपने व्यवहार पर बहुत शर्मिंदा हुई और उन्होंने हंसते हुए शालिनी का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा कि हम बहुत भाग्यशाली हैं जो हमें इतनी सर्वगुण संपन्न बहू मिली।

दोस्तों एक लड़की जब अपना घर छोड़कर दूसरे घर परिवार में जाती है तो वहां के संस्कार और रहन-सहन बिल्कुल भिन्न होते हैं थोड़ा बहुत वक्त उसको लगता है वहां के माहौल में ढलने में जिसमें उसकी मदद अगर परिवार के सभी सदस्य मिलकर करें तो शायद उसको कभी भी अपने मायके की कमी महसूस ना हो ।

सभी के मिले-जुले सहयोग की भावना से ही तो नए रिश्तों की शुरुआत होती है।


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