Kamini sajal Soni

Abstract


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Kamini sajal Soni

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सर्पदंश

सर्पदंश

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वो कहते हैं ना कि सांप को जितना भी दूध पिला लो वह सांप ही रहेगा और सांप की ही तरह व्यवहार करेगा ... और मौका मिलने पर डस लेता है।

सुबह से ही संजू की बड़ी बहन निराला तेज स्वर बड़बड़ा रही थी ...कितना घनिष्ट समझते थे तुम अपने मित्र को और देखो आज मौका मिलते ही उसने डस लिया तुमको .......घर के चारों ओर धुआंधार बारिश से गिरता हुआ पानी एक नाले का रूप अख्तियार कर चुका था।


निराला की बड़बड़ाहट सुनकर संजू भी चौंक कर उठ बैठा जो कि शाम को ही बुखार की दवाई खाकर गहरी नींद सो गया था।"क्या हुआ दीदी !!क्यों सवेरे से बड़बड़ा रही हो और चिल्ला चिल्ला कर पूरा मोहल्ला इकट्ठा कर रही हो।"


" निराला!!! बड़बड़ाऊं ना तो क्या करूं कल रात से तुम्हारी बहुरिया जो घर नहीं आई है।"संजू चौक जाता है और बेफिक्री से बोलता है "अरे दीदी!!! कल की घनघोर बारिश में फंस गए होंगे बेचारे और तुम देख तो रही हो घर के चारों ओर बारिश का पानी इकट्ठा होकर नाले का रूप धारण कर चुका है।"निराला का गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ था उसका स्वभाव ही ऐसा हो गया था कि वह बात बात पर चिड़चिड़ाने लगती .. .....

पिछली रात खूब तेज आंधी के साथ बारिश हुई थी चारों और पेड़ के पत्ते ही पत्ते बिखर गए थे और ऊपर से तेज पानी.... जिस तरह घर के आंगन में कीचड़ मच गया था शायद वैसा ही कीचड़ विशाखा के मन में भी फैल चुका था।और उसके मन में संजू की पत्नी संजना को लेकर कितने गलत गलत विचारों ने जन्म ले लिया था।

संजू की पत्नी संजना कल संजू के मित्र बलवीर के साथ घर की जरूरत का कुछ सामान खरीदने गई थी क्योंकि संजू कई दिनों से बुखार में तप रहा था उसका बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था। डॉक्टरों की दवाएं कुछ खास काम नहीं कर रही थी राखी का त्यौहार मनाने के लिए विशाखा अपने भाई के घर आई हुई थी ।

कितनी बेचैन हो रही थी संजना त्यौहार सर पर आ गया है घर का सारा राशन पानी खत्म हो चला है। मौसम विभाग ने कड़ी चेतावनी दी कि अगले कुछ दिन भारी बारिश का जोर रहेगा तो संजू के कहने पर ही संजना घर की जरूरत का सामान खरीदने संजू के बचपन के मित्र बलवीर के साथ गई हुई थी। भारी बारिश के चलते फोन कनेक्शन भी नहीं मिल पा रहे थे जिससे संजना और बलवीर का हाल पता चल जाता।

विशाखा बलवीर को कुछ खास पसंद नहीं करती थी और ऐसे समय में जबकि उसकी भाई की तबीयत खराब थी तो उसका घर में आना-जाना विशाखा को फूटी आंख न सुहाता वह संजना और बलवीर को पहले से ही शक की नजर से देखते आ रही थी।और आज तो उसके शक हो जैसे पंख लग गए थे जो मन में आ रहा था बोले चली जा रही थी एक एक शब्द उसका संजू के दिल को छलनी कर रहा था।विशाखा के शब्द सुनकर संजू का सिर चकराने लगा था पैरों में कंपकंपी होने लगी कानों में हाहाकार हो उठा और अब तो उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पास ही रखे पलंग के पाये को पकड़कर वह उकडूं बैठ गया ।

जैसा विशाखा सोच रही थी ऐसा तो पाप उसके मन में अपनी पत्नी के लिए और मित्र के लिए जरा भी ना था । कितना प्यार करते थे दोनों एक दूसरे से उनके रिश्ते में शक तो कभी भूल कर भी अपनी पैठ नहीं बना सकता था । दोनों अटूट प्यार के बंधन में बंधे थे। फिर यह आज विशाखा कैसा सर्पदंश दे रही थी संजू को....

वह बार-बार संजना के प्रति विशाखा के मन की गलतफहमी को दूर करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन विशाखा के मन के विचार तो एक गंदे नाले का रूप धारण कर चुके थे। वह कुछ भी नहीं सुनना चाह रही थी शायद उसने अपने सोचने समझने की शक्ति भी खो दी थी कि इतनी भारी बारिश में शायद आना संभव ना हो पाया हो इसीलिए वह कहीं रुक गई होगी।विशाखा अपने भाई को बहुत प्यार करती थी और यही प्यार असुरक्षा की भावना का रूप ले चुका था शायद उसे अपने से ज्यादा शुभचिंतक अपने भाई के लिए और कोई भी नजर नहीं आ रहा था यहां तक कि उसकी पत्नी और सगे भाई से भी बढ़कर मित्र भी नहीं।

लड़खड़ाते कदमों से संजू बाहर आंगन में निकल कर आया एक नजर उसने घर के बाहर बहते हुए पानी के नाले के ऊपर डाली तो दूसरी तरफ घर के अंदर उसकी बहन विशाखा के शक रूपी शब्दों का बहता गंदा नाला..... .



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