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Padma Agrawal

Romance Inspirational

4  

Padma Agrawal

Romance Inspirational

प्यार का फसाना

प्यार का फसाना

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“ माई सेल्फ निया, फ्राम रामजस कॉलेज ‘

’ गोरा रंग, तीखे नैन नक्श, तरतीब से कटे हुये बॉबकट हेयर स्टाइल ..आसमानी जींस और लाल स्लीवलेस टॉप में उस आधुनिका ने फर्राटेदार इंग्लिश में अपना इंट्रोडक्शन दिया। उसका कॉन्फिडेंस और धाराप्रवाह इंग्लिश सुन माधव स्वयं में सिमट गया था। अब उसको ही स्टेज पर जाकर माइक पर अपने विषय में बोलना था। वह वहां से अपना मुंह छिपा कर भाग जाना चाह रहा था, जो इस समय संभव नहीं था।

‘’मैं माधव कुशवाहा यू. पी . के कायमगंज से,मुझे 98.7 प्रतिशत नंबर मिले हैं। ‘’ 

हॉल सबके ठहाकों से गूंज उठा था। वह संकुचित हो उठा था....

गेंहुआं रंग, आंखों पर चश्मा, बालों में तेल चुपड़ा हुआ, सस्ती पैंट और सिलवटों वाली शर्ट के साथ अटकते हुये वह मुश्किल से बोल कर पीछे की सीट पर आकर बैठ गया था। इस समय वह उस घड़ी को कोस रहा था, जब उसने यहां एडमिशन लेने का निश्चय किया था। वह सिर झुका कर अपने दोस्त राघव को याद कर रहा था। उसकी आंखें भीग उठी थी।

“हेलो, माधव .....यू आर जीनियस ...आओ एक कॉफी हो जाये ‘’

किसी लड़की के साथ बातचीत और दोस्ती का यह उसके जीवन का पहला अवसर था .... वह घबराया हुआ एकदम से खड़ा हो गया था। निया को सामने देख उसके मुंह से आवाज ही नहीं निकली ... हड़बड़ाहट में उसके मुंह से नमस्ते निकल पड़ा। वह सकुचाया सा उसके पीछे चल पड़ा था। कैंटीन में निया के दोस्तों का ग्रुप पहले से बैठा हुआ था। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की फैशनेबिल लड़कियों को देख फिर से घबरा उठा था, लेकिन निया के बेतकल्लुफ व्यवहार से वह धीरे धीरे खुलने लगा था। पहली नजर में ही वह निया को अपना दिल दे बैठा था।

 हेलो.. हाय.. कहते हुये सबके साथ उसकी भी दोस्ती हो गई थी। किशोर, मधुर, नमन और टीना के साथ वह भी उनके ग्रुप का मेम्बर बन गया था। अब मुश्किल ये थी कि वह सब संपन्न परिवारों के दिखाई पड़ रहे थे, वह सब ब्राण्डेड कपड़े पहनते, गाड़ियों में चलते.... जब कि वह बिल्कुल साधारण परिवार से था, उसके पिता किसी तरह से उसके लिये फीस आदि का प्रबंध कर पाते थे ..परंतु बेटे को बाहर रह कर कोई परेशानी न उठाना पड़े इसलिये वह उसे मुंहमांगी रकम भेज दिया करते।

वह क्लास में बैठ कर कुछ लिख रहा था तभी निया आई ....

“माधव कल रात में तुम ऑन लाइन नहीं थे?"

वह कैसे कहता कि उसका नेट पैक समाप्त हो गया था और उसने जान बूझ कर रिचार्ज नहीं करवाया था ...

“हां, मैं बुक से नोट्स बनाने में लगा हुआ था, एक्जाम के साथ साथ एसाइनमेंट भी तो सबमिट करना है ... इसलिये किताबों से सिर मार रहा था ...’’

“बोर मत किया करो ... हर समय पढ़ाई- पढ़ाई.... मेरी ओर देखो ... कल मैंने नया हेयर कट करवाया है .. देखो मेरे फेस पर सूट कर रहा है कि नहीं ...?’’

माधव ने सिर उठा कर उसकी ओर ध्यान से देखा तो देखता ही रह गया....नई हेयर स्टाइल में कटे हुये स्ट्रेट बाल, धनुषाकार सेट की हुई आई ब्रो, कजरारी बड़ी बड़ी आंखें जिनमें गजब का आकर्षण था। पिंक टी शर्ट और व्हाइट पैंट में उसका सौंदर्य निखर उठा था ....

उसने छेड़ने के अंदाज में कह दिया ‘’ये क्या ? बालों का क्या हाल बना लिया ... तुम्हारे तो इतने सुंदर कर्ली हेयर थे ....’’

“ हां कर्ली थे ...मुश्किल से मम्मा से 5000 रु और पर्मिशन मिली ... तब तो स्ट्रेट करा पाई.... क्यों अच्छे नहीं लग रहे हैं ? मॉम कहती हैं कि केमिकल से बाल खराब हो जायेंगे ....

‘’हां, यह बात तो सही है ...लेकिन तुम्हें बालों को स्ट्रेट करवाने की क्या जरूरत थी ...कर्ली बाल तो तुम्हारे चेहरे पर सूट कर रहे थे ....’’

“क्या कहा ? तेरी वजह से तो मैंने अपने बाल स्ट्रेट कराये ... तू उस दिन निशू के बालों से नजर नहीं हटा रहा था ... मुझे इग्नोर कर रहा था ... उसी दिन मैंने सोच लिया था कि मैं उसी की तरह अपनी हेयर स्टाइल बनवाऊंगीं ....’’

“अरे पगली मेरी निगाह तो उसके ओपेन बैक पर थी ... उस दिन उसने कितनी स्मार्ट ड्रेस उसने पहन रखी थी ... शी वाज लुकिंग सो अट्रैक्टिव .... लुकिंग लाइक ए मॉडल ....’’

“ओ.के. “ वह नाराज होकर उसकी पीठ पर एक धौल जमा कर बोली, ‘’जाओ ...जाओ उसी निशू की बांहों में खो जाओ ... वह तुम्हारी तरफ अपनी निगाहें भी नहीं उठायेगी ....’’

“जा.... जा... तू उसका इस साल का पांचवां ब्वाय फ्रेंड होगा ‘’.....वह पैर पटकती हुई अपनी स्कूटी की ओर जाने लगी तो माधव ने उसके हाथ से स्कूटी की चाभी छीन ली और बोला, ‘’ कहां जा रही हो ? मैं तो तुझे यूं ही छेड़ रहा था। ‘’

“कहां जा रही हो? मैं तो तुम्हें यूं ही छेड़ रहा था ....’’

“माधव, हां यार ...तुमने वह एसाइनमेंट पूरा कर लिया ….?’’

“हां.. हां.. कल रात भर जग कर पूरा कर पाया हूं। ‘’

“ डियर, मेरी हेल्प कर दोगे ...प्लीज ...’’

माधव डियर सुनते ही पिघल उठा था और खुशी खुशी उसका एसाइनमेंट पूरा करने में जुट गया था। वह बैठ कर अपने मोबाइल पर हंस हंस कर चैटिंग करती रही। उसे थोड़ा खराब भी लगा था लेकिन वह उसे नाराज नहीं करना चाहता था। उसके लिये बड़ी बात थी कि क्लास की फैशनेबिल और सुंदर लड़की उससे प्यार करती है। वह उसे महंगे गिफ्ट तो नहीं दे पाता, मन ही मन डरता रहता था कि वह किसी दूसरे को अपना ब्वायफ्रेण्ड न बना ले, हर पल उसका दिल धुक धुक करता रहला उसी वजह से वह उसी उथेड़बुन लगा रहा कि वह कहां से पैसे का जुगाड़ करे .... एक दो दिन ही बीते थे वह क्लास में परेशान सी बैठी हुई थी ....

‘’क्या हुआ तुझे ? बड़ी उखड़ी लग रही हो ...?’’

“मेरा मूड आज ठीक नहीं है ... तुम जाओ अपना क्लास करो .... पढ़ाई करो ... मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ...’’

“बता न ..मेरी कसम ... मैं तेरी हेल्प कर दूंगा ‘’

“वह आंखों में आंसू भर कर बोली, ‘तुम्हारे चक्कर में उस दिन पार्लर गई तो मेरी सारी पॉकेट मनी स्वाहा हो गई, मां से पैसे मांगे तो नाराज हो गईं .... अब मेरा फोन बंद पड़ा है ....बताओ कैसे रिचार्ज हो ...?’’

“तुम जाओ यार ...’’

“मैं रिचार्ज करवा देता हूं ... बस इतनी सी बात ... ‘’

उसने दिलेर बनते हुये उसका फोन रिचार्ज करवा दिया लेकिन मन ही मन वह अपने पैसे के गुणा भाग में जुट गया था कि उसे सुबह का नाश्ता कितने दिनों के लिये बंद करना पड़ेगा .... परंतु साथ में निया को खुशी देखकर वह खुश था क्यों कि वह उसे दिखाना चाहता था कि वह उसको खुश करने के लिये कुछ भी कर सकता है।

एक दिन वह बोली माधव मैंने थियेटर की टिकट बुक करवा दी है, आज 5 बजे प्ले देखने चलेंगे। निया के साथ थियेटर की कल्पना करके वह खुशी से झूम उठा परंतु वह नहीं जानता था कि प्यार के चक्कर में पड़ कर वह किस भंवर जाल में फंसता जा रहा है .... थियेटर जाने के लिये वह बन ठन कर निया के साथ पहुंचा तो वहां पर किशोर की टीम उसका इंतजार कर रही थी। वह सकपका उठा था लेकिन उस दिन उन लोगों ने अपने ग्रुप में शामिल करते हुये कहा ‘,वेलकम माई फ्रेंड’ कह कर स्वागत किया। उनके ग्रुप में शामिल होकर अब वह भी अपने को बड़ा स्मार्ट और दादा समझने लगा था।

प्ले समाप्त होते ही उन सबके कदम एक वाइन शॉप की ओर बढ़ गये थे। वह वाइन के लिये बार बार मना करता रहा लेकिन उन सबने उसे जबरदस्ती करके पिला दिया था। कड़वे और तीखे स्वाद से उसे लगा, जैसे गले और आंतें .. सब कुछ जल गया है ... उसकी आंखों में पानी आ गया था।

निया ने मेसेज करके उससे सॉरी बोल दिया था ....

परंतु फिर भी उस दिन उसने निश्चय कर लिया था कि अब वह दोस्ती यारी छोड़ कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देगा। इसलिये वह अपने एक्जाम की तैयारी में लग गया था लेकिन निया की प्यारी सी सूरत और उसकी बातें उसका पीछा नहीं छोड़तीं, इसलिये अक्सर चैटिंग हो जाया करती थी। दोनों की मुलाकात हुये कई दिन बीत गये थे। माधव एक्जाम की तैयारी में लगा हुआ था तभी मेसेन्जर पर नोटिफिकेशन आया, जिज्ञासावश वह देखने लगा,

“माई वैलेन्टाइन .... (किस की इमोजी ) हैप्पी वैलेन्टाइन डे ‘’

निया उसे माई वैलेन्टाइन कह रही है .... उसके दिल की धड़कनें बढ़ गईं थीं। निया भी उसे प्यार करती है तभी तो माई वैलेन्टाइन कह रही है। अब तो उसे उसके लिये कोई मंहगा वाला गिफ्ट खरीद कर देना पड़ेगा। अगले दिन वह उसे पकड़ कर जबरदस्ती पिक्चर देखनी है, कहते हुये पिक्चर ले गई। तुरंत के तुरंत उसके 1000 रु खर्च हो गये थे.....वह भी तो बेवकूफ है बड़ा शाहखर्च बन जाता है ....मना भी तो कर सकता था, क्या करे वह निया को बहुत प्यार करता है ... उसको देखते ही सब कुछ भूल जाता है ... उसे अपनी पॉकेट के वजन का भी ध्यान नहीं रहता .... इस बार तो वह कोचिंग और बुक्स के बहाने से अम्मा से रुपये झटक लाया था, वह भी निया का कैसा दीवाना बन बैठा है ...अम्मा बेचारी के चेहरे पर कितनी मायूसी छा गई थी..जब उन्होंने बक्से के कोने से मुड़े तुड़े नोट निकाल कर देते हुये बोली थीं,’’ मुन्ना पढ लिख कर कलक्टर बन जाओ तो हम सबन की जिंदगी संवर जाये ...’’

    वह इतना नालायक है कि जनाब एक लड़की के साथ इश्क फरमा रहे हैं ..... लानत है माधव तुम पर .... उस दिन उसने फिर से निश्चय कर लिया थाकि अब वह निया का चक्कर छोड़ कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देगा .... लेकिन ‘’माई वैलेन्टाइन’’ देखते ही वह सब कुछ भूल कर एमेजन की साइट पर उसके लिये गिफ्ट देखने लगा .... वह ऩिया के सपनों में खोकर ... कल गिफ्ट के लिये पैसे की जुगाड़ कैसे करेगा, यह सोचने में लग गया था। कल आदिल से 1000 रु. लूंगा तो कुछ दिन काम चलेगा ... निया के मुस्कुराते चेहरे की कल्पना के चलते उसकी आखों की नींद उड़ गई थी । वह बेकरारी से सुबह होने का इंतजार कर रहा था। वह क्लास के कई सारे लड़कों से पैसा मांग चुका है, लौटाने की सोचता भी है तो बस निया को खुश करने के चक्कर में सब खर्च हो जाता है।

    पूरे क्लास में सब उसके नाम को निया के साथ जोड़ते हैं तो वह खुशी से झूम उठता है ...कल वह जरूर वह उससे कहेगी ‘आई लव यू ‘ बस वह अपनी बांहों के घेरे में उसे लिपटा लेगा।

अगली सुबह वह अपनी नई शर्ट पहन कर पहुंचा तो निया उसके पास आई और ‘माई वैलेन्टाइन ‘ कह कर एक गुलाब देकर ‘आई लव यू ‘बोली तो वह अपना होश खो बैठा था।

“आई लव यू टू ‘’ खुशी के मारे उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे ।

माधव, चलो न आज किसी अच्छी जगह ट्रीट दो ... मुझे भूख लग रही है। वह अपने जेब में हाथ डाल कर रुपये गिनने लगा था । वह मन ही मन परेशान हो उठा था। उसकी मस्ती और प्यार का खुमार पैसे की झंझट में उलझ रहा था।

दो चार दिन किसी तरह बीते फिर उसने पापा को फोन करके कहा, ‘’पापा, मुझे बुखार आ गया था, हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा था, इसलिये उसे दोस्तों से पैसे उधार लेना पड़ा था लेकिन पापा तो अम्मा को साथ लेकर अपने बचवा की तबीयत का हाल जानने आ पहुंचे थे ।

    वह मन ही मन बहुत पछताया भी था कि अपने प्यार के नशे में वह अपने अम्मा पापा से सफेद झूठ बोल रहा है। पापा जाते समय उसकी मुट्ठी में नोट रख कर बंद कर गये थे और पापा से नजर बचा कर जब अम्मा ने भी अपनी ब्लाउज के अंदर से मुड़े तुड़े नोट निकाल कर उसकी मुट्ठी में रखे तो उस समय अम्मा पापा के चेहरे की मायूसी और बेचारगी देख उसका माथा शर्म से झुक गया था एवं उसका सर्वांग कंपकंपा उठा ...

 परंतु निया का चेहरा देखते ही वह उसके प्यार के झूले में झूलने लगता .... ये प्यार या रोमांस भी कितना आकर्षक है कि लड़का हो या लड़की को मदहोश करके उन क्षणों में उसके ज्ञान तंतु तंद्रवस्था में पहुंच कर सुषुप्त हो जाता है।

माधव की मुट्ठी में 500- 500 के नोट थे ... वह अपनी प्रियतमा को खुश करने के लिये उतावला हो उठा था जहां उसकी बांहों में उसकी निया होगी और साथ में हाथों में जाम होगा, जाम के सुरूर में वह अपनी प्रियतमा को अपने आलिंगन में समेट लेगा तुरंत ही उसके अंतरात्मा ने उसे यह करने से रोका ..... माधव ये पैसे तेरे माता पिता के खून पसीने की कमाई के हैं ....उन लोगों को तुमसे बड़ी आशायें और उम्मीदें हैं ..... उसके बढ़ते कदम एकदम से ठिठक गये ...उसने अपने मन को हजारों तरह से समझाने की कोशिश की .... वह पढ़ने में मन लगाने का प्रयास करने लगा था।

परंतु अगली शाम निया के एक मेसेज को देखते ही सब कुछ भूल गया था ....’आई ऐम मिसिंग माई लव …कम सून .. आई ऐम वेटिंग ...’

उसने दिल कड़ा करके लिखा, ‘नो माई डियर आई ऐम बिजी फॉर टुमॉरो एक्जाम ..’

“ओह, सॉरी ... प्लीज मेरे थोड़े से डाउट्स हैं ... तुम्हीं क्लीयर कर सकते हो .... प्लीज हेल्प मी ... माई लव, आई ऐम वेटिंग .... अपनी वही कोने वाली जगह पर जहां से हम सबको देख सकते हैं, लेकिन हम लोगों को कोई नहीं देख सकता.....वह जल्दी जल्दी रेडी हो रहा था ...

उसी समय कमरे में उसका पार्टनर आयुष आया वह भी उसी की तरह साधारण परिवार से था ... माधव कितनी टफ और नीरस लाइफ है ...कॉलेज, कोचिंग फिर नोट्स प्रिपेयर करना .... देर रात तक फिर कोचिंग का रिवीजन, बुक्स, पेपर सॉल्व करना कितनी डल लाइफ है .... अपने मम्मी पापा और दोस्तों की बहुत याद आती है ...

“रिलैक्स यार....’’

“तू तो बड़े लोगों के ग्रुप में शामिल हो गया है ...और तेरी गर्लफ्रेंड भी है ... तेरा क्या... मस्ती कर ....

अरे क्या नाम बताया ....निया .... वही सेकेण्ड ईयर की पी. सी. एम.वाली ....’’

“हां – हां लेकिन तू उसे कैसे जानता है .... उसके तो कई ब्वायफ्रेंड रह चुके हैं .. लगता है इस बार तुझे शिकार बनाया है ‘’

“ना यार, ऐसा मत बोल शी लव्ज मी ...’’

वह जोर से ठहाके मार कर हंसा ... यार मेरी मान ‘ऐसा कोई सगा नहीं जिसे ठगा नहीं ‘ तुम सीधे सादे लड़के इन आधुनिक छोरी के भंवरजाल में फंस गये हो ... मेरे फ्रेंड अर्णव के साथ भी बहुत दिनों तक इसने ऐसा ही प्रेम प्यार का खेल खेल कर बेवकूफ बनाती रही ....उसका फोन बज उठा था ...बात अधूरी छूट गई थी ..

 वह महसूस कर रहा था कि जब भी निया उसके पास आती उससे कुछ न कुछ खर्च करवा लेती, या अपना एसाइनमेंट करवा लेती है। पैसा देने का ड़्रामा तो करती है, लेकिन कभी देती नहीं .... क्या वह सच में उसे चीट कर रही है ... फिर भी उसे विश्वास नहीं हो रहा था क्यों कि वह निया को जी जान से प्यार करता है .... अपने भविष्य के अनगिनत सपने बुन रखे हैं ... उसकी आंखों से दो बूंद आंसू बह निकले ... वह उदास हो उठा

अर्णव झूठ क्यों बोलेगा भला...

अब उसे अपनी दीवानगी याद आ रही थी ... मां बाप ने उसे कितने अरमानों से अपने खून पसीने की कमाई उस पर खर्च की कि वह लायक बन कर परिवार का खेवनहार बने.... वह आधुनिकता की आंधी में सब कुछ भूल कर इश्क के चक्कर में सबके सामने हाथ पसार कर, झूठ बोल कर पैसा ऐंठता रहा.... लानत है .. उस पर...

वह बार बार निया को व्हाट्सऐप, मेसेन्जर और इंस्ट्राग्राम पर मेसेज करता रहा ..लेकिन उसका उत्तर नहीं आया ... उसके पास नाराज या गुस्सा करने का हक तो कभी था ही नहीं ...

तभी अर्णव ने उसे चैट दिखाई जिसमें निया ने लिखा था ...कभी गिफ्ट तो कभी बढ़िया ट्रीट और साथ में एसाइनमेंट पूरा करवाने के लिये प्यार के फसाने में क्या बुराई है .....

माधव भौचक्का सा न रो पा रहा था न हंस पा रहा था परंतु प्यार के फसाने ने आज जिंदगी का बहुत कीमती पाठ पढ़ा दिया था।



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