Vaibhav Dubey

Romance


5.0  

Vaibhav Dubey

Romance


खट्टे सपने

खट्टे सपने

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आज पूरे बारह दिनों के बाद मैसेंजर पर मिले हुए रिप्लाई को देखकर मैं जोर-जोर से हंस पड़ा और धीरे से बुदबुदाया, "फंस गया एक और बकरा हलाल होने के लिए"...मैं पागलों की तरह हँसे जा रहा था तभी मोबाइल से नज़रें हटाकर सामने देखा तो ऑफिस के सभी लोगों की मुझसे सवाल करती हुई नजरें मेरी तरफ थी...मैं झेंप गया और जैसे तेज रफ्तार से चलती गाड़ी के आगे अचानक किसी के आने से इमरजेंसी ब्रेक लगते हैं वैसे ही मेरी हंसी को भी ब्रेक लग गया था

किरन भी मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी। शायद... वो मन ही मन मुझे चाहती थी पर मेरे ख्वाबों ख्यालों में तो कोई अनदेखा चेहरा ही बसा हुआ था मेरी नज़र में वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी बस...सिर्फ दोस्त ! मेरी हंसी को देखकर उसका गुलाब सा चेहरा मुरझा सा गया था जैसे अपने प्यार को किसी और के साथ देख कर सीने में जलन सी होती है ठीक वैसे ही लगभग चिढ़ते हुए मुंह पर बनावटी हंसी लाकर बिल्कुल मेरे पास आकर फुसफुसा कर वो बोली,"क्यूँ कोई मिल गई है क्या मुझसे भी अच्छी ?"

मैंने उसके गाल पर धीरे से चपत लगाते हुए जबाब दिया, "मिल नहीं गई है...मिल गया है।" पगली..

किरन ने ऐसे मुंह बनाया जैसे कह रही हो...मैं कुछ समझी नहीं !

मैंने मुस्कुराते हुए शाहरुख खान के अंदाज में कहा,"तुम नहीं समझोगी कि.. कि... कि..कि..किरन...।"

और हंसते हुए अपनी फाइल उठा कर बॉस के केबिन की ओर बढ़ गया।

मुझे अब फेसबुक पर लड़की वाली आई डी बनाकर लड़कों को उल्लू बनाने में बहुत मजा आने लगा था। सुबह का घटनाक्रम भी इसी बात से जुड़ा हुआ था ...दरअसल एक स्मार्ट से लड़के आर्यन की आई डी पर मैंने आलिया नाम की अपनी फर्जी आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी...और आज उसने रिकवेस्ट एक्सेप्ट भी कर ली थी और साथ ही मैसेंजर पर मैसेज किया था कि हैल्लो फ्रेंड।

मैंने भी लड़कियों जैसे ही नखरे दिखाते हुए चार दिन बाद एक स्माइली चिपका दी...तब तक उसके गुड मॉर्निंग, गुड नाईट के मैसेज देख कर मैं रोज हंसता मगर रिप्लाई नहीं करता था..

मुझे पता था ये लड़का भी पहले ऐसे ही हेल्लो फ्रेंड बोलेगा फिर, हेलो डिअर, फिर हेलो माई स्वीटहार्ट बोलेगा और फिर लव वाली शायरी ...ढेर सारे फूल ...और न जाने क्या क्या..फिर कभी रात की तन्हाई में बात करते हुए मुझे किस करने की इच्छा जतायेगा...और फिर एक दिन अपनी औकात पर आ ही जायेगा और मुझे किसी होटल में अकेले मिलने बुलायेगा...बस यही वो पल होगा जब मैं उसे सच से रूबरू कराऊंगा और जब उसका दिल जमीं पर गिरकर टूटकर बिखरे हुए आईने की तरह बेबस सा पड़ा होगा...मैं जोर-जोर से हंसूंगा।

मेरी और आर्यन की चैटिंग लगभग रोज ही होने लगी थी...पर उस बन्दे में कुछ तो था.. फिसलने का नाम ही नहीं ले रहा था ...मैं चाहता तो उसे ब्लॉक भी कर सकता था पर अब वो मेरे लिए एक चेलेंज की तरह था...एक दिन किरन कि बर्थ डे पार्टी में मुझे एक ख़्याल सूझा मैंने आर्यन के चैटिंग बॉक्स में लिखा"आर्यन हमें चैटिंग करते हुए बहुत दिन हो गए हैं आज मैं तुम्हारी आवाज़ सुनना चाहती हूँ.. मेरे पर्सनल नम्बर के लिए तो तुम्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा पर तुम मुझे मेसेंजर पर वॉइस कॉल कर सकते होअभी मैं मेरी एक फ्रेंड की बर्थ डे पार्टी मे आई हूं फिर घर पहुंच कर बात नहीं हो पाएगी ...क्योंकि तुम्हें तो पता ही है कि मैं एक कंजर्वेटिव फैमिली से बिलोंग करती हूं और कॉलेज में भी मुझे मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं है...

ऑनलाइन होते हुए भी उसका कोई रिप्लाई नहीं आया...और अचानक वो ऑफलाइन हो गयामैं सोच में पड़ गया आज के समय में ऐसे भी लड़के होते हैं क्या ?लड़की ऑफर दे रही है और ये ? अजीब है...

बर्थ डे पार्टी में केक कटने के बाद सभी डिनर लेने लगे पर मुझे भूख ही नही लग रही थी ।मैं न जाने क्यों बार-बार मैसेज बॉक्स खोलकर बैचेनी से दिमाग में कई सवाल लिए हुए आर्यन के मैसेज का इंतजार कर रहा था।

"इतनी बैचेनी तो लड़कियों में ही होती है"मैंने मन ही मन बड़बड़ाया। नहीं...मैं तो लड़का ही हूँ मेरा नाम डॉक्यूमेंट में भी रोहित ही लिखा हुआ है ...पर मुझे आर्यन से इतना लगाव सा क्यूँ लग रहा है उससे चैटिंग करने का मन क्यूँ करता है अब उसके मैसेज देखकर जोर-जोर से हंसता क्यूँ नही हूँ ...क्या मुझे लड़के पसन्द हैं ?छि..ई.ईईये नहीं हो सकता ? मुझे आज ख़ुद पर शक होने लगा था। मैं लड़का ही हूँ... मैं लड़का ही हूँ ...ख्यालों में खोये हुए कब मेरी आवाज 

मेहमानों का हालचाल लेती हुई बर्थ डे गर्ल किरन के कानों में पहुंच गई..मुझे पता ही नहीं चला...

"हाँ तुम लड़के ही हो मुझे पूरा विश्वास है।" किरन ने हंसते हुए कहा और प्लेट से उठाकर केक का एक बड़ा सा टुकड़ा लगभग मेरे मुंह मे ठूस ही दिया ।मैंने भी ख़ुद को सम्हालते हुए केक उठाकर उसके पूरे मुंह पर मल दिया सब लोग हमें देखकर ठहाके लगा कर हंस पड़े और हम दोनों भी।

पार्टी का लगभग दी एंड हो चुका था पर डीजे पर अभी भी "पार्टी अभी बाकी है" की धुन बज रही थी और किरन के रूम पर बस किरन को मिलाकर हम पांच सबसे अच्छे दोस्त ही रुके हुए थे ...किरन हम सभी को खींचते हुए डांस फ्लोर पर ले गई और फिर शुरू हो गया था बादशाह के गानों पर मस्ती डांस.मैंने एहतियातन अपना मोबाइल जेब से निकाल कर कुछ दूर रख दिया थाडांस करते हुए अचानक मोबाइल की स्क्रीन चमक उठीमैंने दौड़कर मोबाइल को हाथों में उठा लिया ...अरे ये तो आर्यन की वॉइस कॉल है..मैंने नाचती हुई किरन का हाथ पकड़ा और उसे डांस फ्लोर से दूर ले गया.. ,"किरन.. यार प्लीज तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त है न ?मेरा एक काम कर दे...प्लीज कर दे न !

"बस सबसे अच्छी दोस्त ?"किरन ने मेरी आँखों मे आंखे डालते हुए पूछा...

उसके इस तरह से देखने ने मुझे अंदर तक एक अनजाने डर से कंपा दिया था...पर मैंने खुद को सम्हालते हुए कहा ,"हाँ अभी तो बस सबसे अच्छी दोस्त पगली" इधर किरन को मनाने में मुझे वक़्त लग रहा था उधर आर्यन की कॉल छठवीं बार रिंग कर रही थी...आखिर किरन मान ही गई मैंने उसे सब बता दिया था अब वो बन गई थी आलिया...

मैंने कॉल उठाई और स्पीकर ऑन कर दिया ...आलिया बनी हुई किरन ने फुसफुसा कर कहा हेलो...उधर से आर्यन की आवाज़ आई "हेलो... सॉरी यार मैं हॉस्पिटल में था,माँ का अचानक बी.पी. बढ़ गया था तो हॉस्पिटल आना पड़ा ,तुम परेशान मत होना अब सब ठीक है"तुम घर पर आ गए हो क्या ?...किरन ने धीरे से कहा, "हाँ... इतनी रात को मुझे घर से बाहर रहने की इजाजत नहीं है,मैं चुपके से बाथरूम में आकर बात कर रही हूँ"

"ओके ओके.. ..ओके तुम जाओ अभी।वैसे तो बात करने का बहुत मन था पर तुम्हें किसी तरह की कोई प्रॉब्लम न हो जाये..हम फिर कभी बात कर लेंगे।अब तुम फोन रखो और जाओ ।गुड नाईट डिअर"आर्यन ने कहा और किरन का जबाब सुने बिना ही फोन काट दिया।

हम दोनों आपस में कुछ कह पाते उससे पहले ही अजय,मनीषा और वरुण की ओ...हो...हो.. हो...करती हुई आवाज़ सुनाई दी ..."अच्छा बेटा तो हम तीनों को उधर डांस में बिजी कर के तुम दोनों यहां रोमांस फरमा रहे हो"...,"मनीषा ने बनावटी गुस्से से कहा"अजय वरुण ताली मार कर ठहाके लगा रहे थे यह सुनकर किरन तो ऐसे शरमा गई जैसे सच में मैंने उसे किस ही कर लिया हो...मैंने झेंपते हुए कहा ,"अरे नहीं यार एक अर्जेंट बात थी" अजय बोला ,"हम्म... हम सब समझ गए हैं तुम्हारी अर्जेंट बात" उधर वरुण जोर जोर से गाना गाने लगा ," दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके,सबको हो रही है ख़बर चुपके चुपके"मुझे यह सब बहुत इरिटेट कर रहा था इसीलिए मैं वहां से किसी से बिना कुछ बोले ही अपने घर की ओर निकल पड़ा।

अगले दिन सुबह सन्डे को मैं देर से सोकर उठा।"ये किरन का बर्थ डे सैटरडे को होने से देर रात तक पार्टी भी हो गई और मस्त नींद भी पूरी हो गई"मैंने हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर ऊपर की ओर खींचकर जम्हाई लेते हुए खुद से ही कहा।मैनें पास में रखा हुआ मोबाइल उठाया (जो कि रात से ही साइलेंट मोड पर था)...देखा तो चौंक गया आर्यन के देर रात के कई मैसेज पड़े हुए थे मैं उन्हें पढ़ने लगा...

"मुझे पता है तुम सो गई हो और मेरे मैसेज सुबह ही पढ़ोगी पर कुछ पूछने का मन कर रहा है अभी पूछता हूँ सुबह पढ़कर जबाब देना..."

मैं आगे के मैसेज और उत्सुकता से पढ़ने लगा...

"जब तुम्हारी हेलो पहली बार सुनी तो न जाने क्यूँ मुझे ये लगा ही नहीं कि ये तुम हो क्योंकि तुम्हारे लिखने के अंदाज में जो मासूमियत नज़र आती है वो तुम्हारे द्वारा बोले गए शब्दों में नहीं आ रही थी,क्या सच में वो तुम ही थी ? ये सुनकर हो सकता है तुम्हें बुरा लगे पर प्लीज तुम नाराज मत होना..."

मैं एकदम से चौंक गया था वास्तव में मैंने उससे बात ही नहीं की थी वो तो किरन थी और आखिर रोहित आर्यन से बात करता भी तो कैसे ?पर ये जान कैसे गया ?मैंने कौतुहलवश आगे पढ़ना शुरू किया...

"मेरे मन मे जो आता है उसे दिल में नहीं रखता बोल देता हूँ ।हम अच्छे दोस्त हैं इसीलिये एक दूसरे को समझते भी हैं ...तुम बहुत प्यारी लड़की हो मैं तुम्हारा कुछ भी ऐसा वैसा कहकर दिल नहीं दुखाना चाहता।हो सकता है मैं ही ग़लत हूँ पर तुमसे कहकर अब हल्कापन महसूस हो रहा है...ओके गुड नाईट डिअर...

सोर ड्रीम...

सोर ड्रीम ? मतलब खट्टे सपने ...कमाल का बन्दा है ...लोग स्वीट ड्रीम कहते हैं और ये सोर ड्रीम...ह्म्म्म"मैंने बड़बड़ाते हुए कहा"

"वैसे लिखना तो मैं भी चाह रहा था कि तुम जब लिखते हो तो बिल्कुल लड़कियों की तरह शब्द होते हैं तुम्हारे पर जब कल आवाज़ सुनी तो तब जाना कि तुम सख्त लौंडे हो"मन ही मन यह सोचकर मैं खुलकर हंस पड़ा

मैंने बस रिप्लाई में इतना लिखा कि, "गुड मॉर्निंगआज सन्डे है तो अब कल बात होगी।

अगले दिन उसका कोई मैसेज नहीं आया...फिर एक और दिन गुजर गया कोई खबर नहीं ? ऐसे एक-एक दिन गुजरते गए पर उधर से कोई रिप्लाई ही नहीं आया और वो कभी भी ऑनलाइन भी नज़र नहीं आया... हालांकि मैंने उसे रोज मैसेज किये परनो रिप्लाई !

"कहीं ऐसा तो नहीं कि उसे मेरी सच्चाई का पता चल गया हो कि मैं जो रोज उसे आलिया नाम से बातें करता हूँ ...एक लड़का हूँ" सोहलवें दिन मैंने सुबह की चाय पीते हुए ख़ुद से बड़बड़ाते हुए कहा।"तुम हमेशा नेगेटिव ही सोचते हो यार कभी तो पोजिटिव भी सोच लिया करो..."मैंने सामने लगे आईने में खुद को देखते हुए अपने ही  सर पर चपत लगाते हुए कहा...और मुस्कुरा दिया..

कहीं उसकी तबियत तो खराब नहीं है...नहीं...ये हो सकता है कि उसकी माँ की तबियत खराब हो गई हो उसने बताया था ...

अभी कॉल करता हूँ उसे ...बिल्कुल तय करते हुए मैंने मैसेंजर की वॉइस कॉल वाली कॉन्टेक्ट लिस्ट से उसका उसका नाम जैसे ही निकाला"अरे तुम पागल तो नहीं हो गए...तुम आलिया नहीं हो रोहित हो."..मैंने डांटते हुए खुद से कहा।

छोड़ो भी जब उसे फ़िक्र नहीं है तो मैं क्यूँ सोचूँ उसके बारे में... ?अरे ...फिर से मैं गर्लफ्रैंड की तरह सोच रहा हूँ...क्या हो गया है मुझे ? लड़को को पागल बनाते बनाते कहीं मैं ही तो पागल नहीं हो गया ? मैनें मन ही मन सोचा और चल दिया अपना फेवरिट गेम बिलियर्ड्स खेलने...जिससे माइंड थोड़ा रिलेक्स हो सके !

इक्कीसवें दिन आर्यन का रिप्लाई आया,"सॉरी यार तुम्हारे ढेर सारे मैसेज आज पढ़ सका हूँ, मैं इंडिया में नहीं था माँ के ट्रीटमेंट के लिए अचानक अमेरिका जाना पड़ा था,अब सब ठीक है...तुम प्लीज गुस्सा मत होना"

कोइनसिडेंटिली मैं भी ऑनलाइन था, मैंने बस इतना लिखा ,"इट्स ओके"

"इट्स ओके" ? बस...रोज मुझे मैसेज तो ऐसे कर रहे थे जैसे प्यार हो गया हो तुम्हें मुझसे" ऐसा लिखते हुए आर्यन ने ढेर सारी हंसती हुई आंखों में खुशी के आंसू वाली टेढ़ी स्माइली भेज दी

रिप्लाई में स्माइली तो मैंने भी भेजी मगर सच कहूँ तो शॉक्ड हो गया था मैं।

 मैंने आर्यन को लिखा,"क्या तुम्हें मुझसे प्यार है ?"

"पता नहीं पर तुमसे बातें करना अच्छा लगता है..."

आर्यन का रिप्लाई आया और साथ ही उसने मुझसे पूछ लिया ...,"और तुम्हें"

उसके उन दो शब्दों ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। इसी पल का तो इंतजार रहता था न मुझे कि कब वो प्यार-व्यार की बातें करे और कब मैं उसे जलील करूँ पर आज उसे सच बताने की हिम्मत क्यूँ नहीं जुटा पा रहा हूँ मैं ?

इसी कशमकश में उलझे हुए मैंने उसे लिख दिया,"मुझे भी पता नहीं"

लगभग दो मिनट बाद आये हुए उसके रिप्लाई ने मेरे पैरों के नीचे से मानो जमीन ही हटा ली थी.. .. .उसने लिखा था ,"पर मुझे पता है तुम मुझे बहुत प्यार करती हो ,तभी तो इतनी चिंता करती हो मेरी ...पर आज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ कि मैं तुम्हारा बहुत अच्छा दोस्त तो बन सकता हूँ पर जीवनसाथी नहीं क्योंकि मेरी जिंदगी का एक बहुत बड़ा रहस्य है जो मैं तुम्हें नहीं बता सकता। मैं कभी तुम्हारा नहीं हो पाऊंगा पता नहीं क्यूँ मुझे भी तुमसे बात करके कुछ अलग वाली फीलिंग होती है। मैंने भी तुम्हें पूरे इक्कीस दिन ग्यारह घण्टे चौबीस मिनट अड़तालिस सैकेंड तक याद किया है और अब बात करते हुए पूरे बाइस दिन छत्तीस सेकेंड्स हो गए हैं..."

यह पढ़कर मैं आश्चर्यचकित रह गया।

समय का इतना सटीक कैलकुलेशन तो बस कोई सच्चा प्यार करने वाला ही कर सकता है। 

"बहुत सीधा बन्दा है बेचारा,आज के बाद मैं ये गन्दा खेल बन्द कर दूंगा,अगर वो सच जान गया तो बहुत ग़लत हो जाएगा।"मैंने बड़बड़ाते हुए खुद से कहा। मैं न जाने क्यों उसे उदास नहीं होने देना चाहता था..

उसके मैसेज को मैंने तीन-चार बार पढ़ा ...

उसके लिखे गए एक वाक्य "कहना चाहती हूँ "पर रिप्लाई देते हुए लिखा ,"चाहती हूँ नहीं चाहता हूँ मिस्टर आर्यन अग्रवाल...आपसे लिखने में मिसप्रिंट बहुत हो जाता है" बड़ी सभ्यता से मैंने उसे लिखा और उसे जितनी बड़ी हंसी वाली स्माइली भेजी उससे कहीं ज्यादा जोर से मैं हंस पड़ा।ओके गुड नाईट डिअर अपना ख्याल रखना...

ये मेरा आखिरी मैसेज था।

मैंने मन ही मन में तय कर लिया था कि अब मैं उसे कभी मैसेज नहीं करूँगा। उससे दूर हो जाऊंगा ,"पर मन नहीं माना तो ?"ख़ुद से सवाल किया मैनें और जबाब में डेटरमाइंड होते हुए अनमने मन से अपनी फेसबुक आई डी को ही डिलीट कर दिया। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी...

अगली सुबह और उसके बाद का हर दिन पिछले दिनों की तुलना में बिल्कुल नया था.. मेरा व्यवहार बदल गया था अब मैं किसी को तंग नहीं करता था .ऐसा कोई काम नहीं जिससे किसी को नीचा देखना पड़े...किरन को मेरा ये बिहेबियर जरा भी पसन्द नहीं आ रहा था...उसने कई बार मुझे समझाने की कोशिश की...पर मुझे कुछ भी अच्छा ही नहीं लगता था।

धीरे-धीरे वो भी मुझसे कतराने लगी थी...और एक दिन मेरे हाथ में अपनी शादी का इनविटेशन कार्ड थमाते हुए लगभग खीझते हुए मुझसे बोली, "मैं अर्णव से शादी कर रही हूँ, बहुत अच्छा लड़का है और हां वो तुम जैसा तो बिल्कुल भी नहीं है।" अर्णव ? अपने बॉस का बेटा न ? मैंने उसकी आँखों मे आँखे डालते हुए पूछा।"हम्म..वही"उसने लम्बी सांस लेते हुए कहा"तुम्हें जरूर आना है..आओगे न ?"मेरा जबाब सुने बिना ही उसने फिर कहा,"तुम जरूर आओगे"ऐसा कहते हुए वो तेज कदमों से ऑफिस के दरवाजे से बाहर निकल गई और मैं झटके से बन्द हुए आगे पीछे हिलते हुए दरवाजे को निहारे जा रहा था,पूरा स्टाफ मुझे ऐसी नज़रों से देख रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो मैंने !

किरन की शादी भी हो गई...वो अर्णव के साथ अब बैंगलोर शिफ्ट हो गई थी...जब मेरे घरवालों को पता चला (जो कि किरन और मेरी शादी के सपने देख रहे थे )तो उन्होंने मेरे लिए आने वाले रिश्तों के स्वागत में घर के दरवाजे खोल दिये थे।मैं घर का इकलौता चिराग जो था सब मुझे अपनी जान से ज्यादा प्यार करते थे ...और मेरी शादी के तो ऐसे सपने सजाये थे कि पूछो ही मत।

शादी तो मुझे भी करनी थी अब पूरे पच्चीस साल का भी तो हो गया था मैं

छोटे चाचा जी रोज नई लड़कियों की तस्वीर लेकर आ जाते वो मुझसे बस दो साल ही बड़े थे तो मुझसे मजाक भी कर लेते थेमैं लड़कियों की तस्वीर देखता और रिजेक्ट कर देता था...किसी भी तस्वीर में वो अट्रक्शन नहीं था जो मुझे दिल से अपनी ओर खींच ले...ऐसे करते करते छह महीने और गुजर गए ...एक दिन बड़े चाचा जी ने गुस्से से कहा ,"अगर ऐसे ही हर किसी लड़की को रिजेक्ट करते रहोगे न तो एक दिन तय है रिश्ते आने भी बंद हो जाएंगे अब कर भी लो यार ...शादी,तुम्हारे हिसाब से लड़की देखना बन्द मेरी अग्रवाल जी से बात हो गई है उनकी लड़की बहुत सुंदर,सुशील है कल हम सब उसे देखने दिल्ली चल रहे हैं कल संडे भी है तो कोई बहाना भी नहीं चलेगा तुम्हारा "ठीक है ? चाचा जी ने जोर देकर पूछा तो मैंने हाँ में सर हिला दिया।

मगर अग्रवाल नाम सुनकर आज पूरे तीन साल के बाद मुझे आर्यन अग्रवाल की याद आ गई थी...वैसे क्या मैं उस सख़्त लौंडे को कभी भूल पाया हूँ,"खुद से सवाल करते हुए मैं पुराने दिनों को याद कर के खिलखिलाकर हंस पड़ा।"

अगले दिन मैं ,माँ ,बड़े चाचा ,छोटे चाचा और मौसी की बेटी यानी कि मेरी प्यारी बहन रिंकी दिल्ली के लिए रवाना हो गए...लड़की वालों के घर पहुंचते ही हमारा स्वागत ऐसे किया जा रहा था जैसे आज ही बहू को विदा करा के हम साथ में ले जाएंगे।मेन गेट से बगीचे को क्रॉस करते हुए हम एक हॉल में दाखिल हुए...दरवाजे के एकदम सामने एक बड़ी सी तस्वीर पर मेरी नज़र ठहर गई...और ठहरती भी क्यूँ न काले लिबास में लिपटी हुई संगमरमर सी सफेद लड़की जिसकी भीगी हुई जुल्फों से टपकती हुई पानी की बूंदें तस्वीर में भी वास्तविकता का अहसास करा रही थींसादगी ऐसी बेमिसाल की एक नज़र में ही प्यार हो जाये...मुंह से निकला बनाने वाले ने क्या तस्वीर बनाई है काश यही वो लड़की होती तो मैं बिना कुछ सोचे समझे हां कह देता...मेरे तस्वीर पर लगे ध्यान को रिंकी की बिल्कुल मेरे कान के पास आती हुई आवाज़ ने तोड़ाभैया भाभी आने वाली है तस्वीर को छोड़ो अब रियल में देखो...

"क्या ? सुनो रिंकी... !यही लड़की हम देखने आए हैं ? ..."हम्म अभी जब आप तस्वीर देखने में कहीं खोये हुए थे तभी होने वाली भाभी के भैया आर्यन ने मुझे बताया."रिंकी ने चुटकी लेते हुए मुझसे कहा।

आर्यन ? वो भी अग्रवाल ! ये क्या हो रहा है मेरे साथ ?आखिर क्यूँ हो रहा है ?

मैंने आर्यन की ओर देखा वो भी मुझे देख रहा था..उसने मुझे हेलो कहा ..मैंने भी उसके चहरे को लगभग घूरते हुए उसे हाय बोल दिया...

और दो मिनट बाद ही बड़ी हिम्मत जुटाकर आर्यन से बोला मुझे अपना घर नहीं दिखाओगे आर्यन ?"श्योर..व्हाई नॉट..."आर्यन ने कहा. ..तभी माँ ने मुझे ऐसे देखा जैसे कह रही हों आर्यन ही क्यों ? घर देखना ही है तो जो चाय लेकर आने वाली है उसके साथ देखो... पर मैंने माँ के देखने को लगभग अनदेखा सा कर दिया...और आर्यन के साथ सबसे पहले बगीचे में आ गया...

उससे डायरेक्ट तो पूछ नहीं सकता था इसीलिए मैंने कहा,"आर्यन तुम्हें बॉलीवुड मूवी पसन्द हैं न "उसने हाँ में सर हिला दिया।मैंने फिर पूछा ,"तुम्हारा फेवरिट एक्टर कौन है ?" टाइगर श्रॉफ ...जबाब आया।और फेवरिट एक्ट्रेस पक्का आलिया ही होगी है न ? मैंने पूछकर उसके चेहरे को ऐसे देखा जैसे मेरे दिमाग में उठते हुए हज़ारों सवालों का अब यही एक सही जबाब आने वाला है पर 'आलिया' नाम सुनकर भी उसके चेहरे के एक्सप्रेसन नहीं बदले "नहीं...मुझे यामी गौतम पसन्द है और आपको ?"आर्यन ने कहा तो मैं शॉक्ड रह गया,आर्यन के सवाल का कोई जबाब भी नहीं दिया और अब 'आर्यन अग्रवाल' का चैप्टर फिर से क्लोज हो गया था...मैंने बोझिल मन से आर्यन के साथ पूरा घर देखा ...और लौटकर उसी हॉल में आ गया ...

तभी सामने से हाथों में चाय की ट्रे लिए हुए वो लड़की आती हुई दिखाई दी"प्रिया नाम है भाभी का"रिंकी ने फुसफुसाते हुए कहा।पीली साड़ी में कढ़ाईदार लाल कलर के फूल ,सुनहरा बॉर्डर,माथे पर छोटी सी गोल्डन कलर की बिंदी,सर पर पल्लू और झुकी हुई नज़रें...सच कहूँ तो वो सामने टँगी हुई तस्वीर से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत नज़र आ रही थी।

प्रिया ने सबको चाय दी और माँ के कहने पर उनके बगल में ही बैठ गई, माँ ने प्रिया के सर पे बड़े प्यार से हाथ फेरा और बोलीं,"बेटा , तुम बहुत सुंदर हो मेरा रोहित भी बिल्कुल हीरो जैसा ही लगता है है न ?"वो मुस्करा दी उसके चेहरे का रंग हल्का ग़ुलाबी हो गया था ...शायद ये शर्म का रंग था।तभी बड़े चाचा की आवाज़ आई ,"अग्रवाल जी आपने अपनी बेटी को इंग्लिश मीडियम कॉलेज में भले ही पढ़ाया हो पर संस्कार तो हिंदी वाले दिए हैं अपने प्यारे भारत वालेहमें आपकी बेटी बहुत पसंद है, अब ये दोनों भी मिलकर एकदूसरे को पसंद कर लेंचलिये हम सब किसी और कमरे में चलते हैं।

सब हम दोनों को अकेला छोड़कर चले गएकुछ देर तक हम दोनों ही शांत रहे,न जाने क्यों उसकी तस्वीर देखकर मुझे उससे एक लगाव सा महसूस हुआ था जो सैकड़ों लड़कियों की तस्वीर देखकर नहीं लगा... ऐसा लग रहा था जैसे मैं पहले भी प्रिया से कभी मिल चुका हूँ, और अब वो मेरे करीब बैठी थी।मैंने चुप्पी तोड़ते हुए पूछा ,"प्रिया जी आपकी ये बड़ी सी तस्वीर देखकर ही आपको मैंने पसन्द कर लिया था पर आप तो तस्वीर से भी ज्यादा प्यारी हैं घरवालों को आपका बिहेवियर बहुत पसंद आया"... और आपको ? "उसकी मीठी सी आवाज़ ने जैसे कानों में अमृत घोल दिया हो।"

मैंने कहा ,"मुझे भी और आपको मैं ?"उसने बड़ी मासूमियत से हाँ में सर हिला दिया...भाभी को भैया पसन्द आ गए ...पर्दे की ओट में छुपी हुई हमारी सारी बातें सुन रही रिंकी नाचते हुए शोर मचाते हुए सामने आ गई तो घर वाले भी हंसते हुए आ गए।छोटे चाचा ने लड्डू उठाकर अग्रवाल जी के मुंह में रख दिया .सब एक दूसरे को बधाई दे रहे थे और मैं प्रिया को देखे जा रहा था।

हम कानपुर लौट आए और शादी की तैयारियां जोरों -शोरों से शुरू हो गई...दो महीने बाद प्रिया हमारे घर में बहू बनकर आ गई थी।

हमारी जिंदगी खुशियों की पटरी पर तेज रफ्तार से दौड़े जा रही थी...मैं प्रिया को पाकर बहुत खुश था उससे कोई पुराना रिश्ता महसूस होता था लगता ही नहीं था जैसे उसे पहली बार में ही देखकर पसन्द किया हो मैने।हमारा मालदीव का हनीमून भी बहुत प्यारा रहा...अब प्रिया मुझसे खुलकर बातें करने लगी थी ...

लगभग छह महीने बाद जब घर पर सिर्फ हम दोनों ही थे एक संडे की सुबह नाश्ता प्रिया के मना करने के बावजूद भी मैंने ही बनाया,प्रिया किचिन में ही साथ में खड़ी होकर मुझे प्यार से देखती रही...और फिर अचानक आगे बढ़कर मेरे गाल पर प्यारी सी किस्सी देकर बोली,"थैंक्स फ़ॉर बीइंग माय हसबैंड"

मैंने मुस्कुराकर उसके माथे को चूम लिया।

नाश्ता रेडी था ..प्रिया बोली,"आप चलो मैं चाय बनाकर साथ में लेकर आती हूँ आप डाइनिंग टेबल पर पहुंचो...और हाँ मेरा मोबाइल प्लीज चार्जिंग पर लगा दो न ..अभी पापा जी से बात करनी है और बैटरी ओनली सिक्सटीन परसेंट ही है"मैंने मोबाइल लिया और डायनिंग टेबल पर आ गया। मोबाइल में कोई पासवर्ड भी नहीं लगा था...मेरी उंगलियां यूँ ही हर एक एप्प को खोलने बन्द करने लगी और आंखे किचेन के गेट पर लगी थी। तभी मेसेंजर ऑन हो गयाऔर जो मैंने देखा उसे देखकर मेरी तो सांसे ही रुक गईं थीं मानो।

आर्यन अग्रवाल सेंट मैसेज टू आलिया. . 

मैंने उसे क्लिक किया उसमें मेरे आखिरी मैसेज.."ओके गुड नाईट डिअर अपना ख्याल रखना..."के बाद के कई मैसेज पड़े थे...मैं एक सांस में मैसेज पढ़ता गया ...

"सुनो आलिया अभी गुड नाईट मत बोलो अभी मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं ..

अरे ..ऑफलाइन हो ही गई तुम...कोई नहीं पर

आज एक झूठ से पर्दा उठ ही जाना चाहिए क्योंकि तुम बहुत प्यारी, मासूम सी लड़की हो मैं तुम्हारा दिल नहीं तोड़ना चाहती।

अब तुम सोचोगी की मैंने 'चाहती' क्यूँ लिखा ...दरअसल मैं लड़का नहीं एक लड़की हूँ ...प्रिया नाम है मेरा ...यह जानकर भी मुझसे दोस्ती करोगी तुम ? दरअसल मेरे एक बेस्ट फ्रेंड को एक लड़के ने रिया बनकर इतना सताया कि वो डिप्रेसन में चला गया तो अब मैं भी फेसबुक पर लड़का बनकर लड़कियों को सताने लगी थी...पर तुमसे मिलकर अब और नहीं। जब तुमने फ्रेंड की बर्थडे पार्टी से मेसेंजर पर मुझे कॉल की थी न तब मैंने तुम्हारी बात अपने भाई आर्यन से कराई थी वो भी इस शर्त पर की अगले दिन मैं उसे उसकी गर्लफ्रेंड से मिलने में हेल्प करूंगी। फिर ढेर सारी स्माइली ...विथ कॉमन वर्ड... सॉरी।

अगर मैं लड़का होती तो मैं जरूर तुमसे ही शादी करती बट बेटर लक नेक्स्ट टाइम।'

और सुनो इतनी जल्दी हर किसी पर विश्वास नहीं किया करोसच कहूँ तो मुझे तुमसे प्यार हो गया है पर वो वाला नहीं।

मेरे मैसेज पढ़ने के बाद शायद तुम मुझसे बात नहीं करोगी पर यह तो तय है कि हम एक न एक दिन जरूर मिलेंगे..हो सके तो मुझे माफ़ कर देना..गुड नाईट सोर ड्रीम्स...न ..न न...आज सोर नहीं स्वीट ड्रीम्स। मीठे सपनों में सो जाओ।

पढ़ते हुए मेरी आँखों से आंसुओं की धार फ़ूट पड़ी... रोकने की बहुत कोशिश कर रहा था पर नाकाम ही रहा ... मैं हिचकियाँ लेते हुए रोये जा रहा था...

मैंने आगे पढ़ना शुरू किया।

आज पांच दिन हो गए हैं तुम्हारा कोई मैसेज नहीं आया ...मेरा भी यह आखिरी मैसेज है ...मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। जिसका पश्चाताप असम्भव हैअब से मैं बस प्रिया हूँ सिर्फ प्रियागुड बाय...आलिया..टेक केयर...।

तभी प्रिया की किचेन से आती हुई आवाज़ ने मेरा ध्यान मेसेंजर से हटाया ,"चाय तैयार है बस दो मिनट में आई।"

मैंने अपने आंसुओं को पोछते हुए...मोबाइल को चार्जिंग पर लगा दिया ...प्रिया भी चाय और नाश्ता लाकर डायनिंग टेबल पर लगा रही थी मैंने आगे बढ़कर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे पीछे से जोर से पकड़ लिया और अपनी थोड़ी उसके कंधे पर टिका दीअरेरे...रे...रे..अचानक बड़ी रोमांटिक हो रही हो मेरी आलिया। मैं उसे भौंचक्का होकर देखने लगा."मैं पत्नी हूँ तुम्हारी ...मैं भी तुम्हारा मोबाइल तो चेक कर ही सकती हूँ न..."जब तुम मोबाइल में हमारे प्यार की कहानी पढ़ रहे थे न मैं नाश्ता लेकर आई थी ...पर फिर लौट गई ...क्योंकि मैं भी मिलना चाहती थी अपनी आलिया से" और

ऐसा कहते हुए उसने मुझे बाहों में भर लिया...।

मैं भी उसके सीने में किसी लड़की सा सिमट गया क्योंकि आज सच में आलिया आ गई थी आर्यन की बाहों में...दोनों के कंधे आँसुओं से भीग चुके थे...मगर ये आंसू ख़ुशी के थे।


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