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Shakuntla Agarwal

Abstract Classics Others

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Shakuntla Agarwal

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"महिला दिवस"

"महिला दिवस"

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महिला दिवस आ रहा है - महिलायें अपने आपको कैसे सशक्त बनाए - उसके लिए कुछ सुझाव 

शारीरिक आध्यातमिक गृहणी के रूप में उनका जिस में भी कौशल हो उसको निखार कर या उसी में उसको सक्षम बनाकर उसके स्वाभिमान को बरकरार रखते हुए उसके पैरों पर खड़ा करना ।गृहणी जो घर के कार्य में सलंगण रहती है उसकी तीनों स्तर पर प्रशंसा होनी चाहिए । आत्मिक रूप से प्रसंशा होनी चाहिऐ क्योंकि वह आध्यात्मिक रूप से धार्मिक रूप से और सांस्कृतिक रूप से घर में वातावरण बना कर रखती है यह अमूल्य है। यह उसका योगदान घर का सुरक्षा कवच बनाता इसलिए हर महिला को आध्यातमिक रूप से जगरूक करना और प्रोत्साहित करना आवश्यक है । इससे उसका आत्मबल और मनोबल बढ़ेगा। स्वाभिमान औरआत्मसम्मान भी बढ़ेगा। जब एक गृहिणी शारीरिक रूप से स्वस्थ होती है ,तब वह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से परिवार की अच्छे स्वास्थ्य, शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य की उन्नति में अपना योगदन दे रही होती है। यह पक्ष भी अमूल्य है क्योंकि कहावत भी है कि "in a healthy soul healthy mind lives to healthy body" इसलिए उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी हमें ध्यान देना होगा। मैने अक्सर देखा है कि घरेलु महिला को हर स्तर पर कमतर आंका जाता है, उसे पुरुष अपने से कमतर आंकता है इसलिए वह उसे सामाजिक, आर्थिक फैसलों से दूर ही रखता है। उससे सलाह मशवरा भी नहीं लिया जाता जीवन के हर एक महत्वपूर्ण पहलु पर उसकी राय अवश्य लेनी चाहिए और सम्मान भी होना चाहिए। यह केवल शब्दों में ही सिमट ना जाए की यह मेरे घर की गृहलक्ष्मी है,देवी है या अर्धांगिनी है , मजाक में तो कह देते हैं कि यह गृहस्वामिनी है और मन से स्वीकार भी करते हैं कि इनके बिना हमारा जीवन अधूरा है परन्तु जब वस्तविकता पर आते हैं तो पाते हैं कि जीवन के महत्वपूर्ण पहलूओं में उनकी कोई राय नहीं होती, सुनकर उनकी बात को अनसुना कर दिया जाता है इसका परिणाम यह है होता है की धीरे-धीरे उसका आत्म-विश्वास धूमिल होने लगता है ।जब वह नवविवाहित आती है उसमें जोश होता है और कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी होती है परन्तु उसको घर सम्भालने में लगा दिया जाता है परिणाम वह घर में ही सिमट कर रह जाती है ।इसका नकारत्मक प्रभाव समाज में आज हमें देखने को मिल रहा है कि आज की नई पीढ़ी की कन्यायें घर को चलाने में विरोध उत्पन्न करने लगी हैं इससे हमारे समाज की और प्राकृतिक व्यवस्था चरमरा रही है, ना तो अब घरों में आध्यातमिक, धर्मिक और सांस्कृतिक विकाश हो पा रहा है और एकल परिवार की पद्धति प्रचलित हो चुकी है ।आत्मिक बंधन और सम्बन्ध प्राय: लुप्त हो चूके हैं। संयुक्त परिवार तो बिखर ही गए हैं ।अब एकल परिवार भी बिखरने लग गए हैं ।यानी समाज में तलाक का प्रचलन हो गया है, शादियां टिक नहीं रही है, जिससे आज की सामाजिक व्यवस्था चरमरा गई है अगर घर में आज का नौजवान शादी से विमुख हो रहा है। जिसका मुख्य कारण अपने घर की माताओं का हर पहलूओं में उचित सम्मान ना होना है ।उसको पांच पहलूओं से तिरस्कार सहना पडता है मानसिक रूप से।

मनसा- मन से

वाचा -भाषा से 

कर्मणा -कर्म से 

सम्बंध संपर्क से 


जन से गृहणियों का एक और पहलू भी है । घरेलु महिलाऐं जो घर में श्रम करती हैं उसका आर्थिक मूल्य एक कामकाजी महिला के सम्मान ही होता है जबकी उसे घरेलु कह कर हीन दृष्टि से देखा जाता है । वह जिस तन्मयता, प्रेम और आत्मीयता से घर को सहजे रखती है वह कोई और दुसरा व्यक्ति नहीं कर सकता इन समस्याओं का निवारण तभी हो सकता है जब एक कामकाजी महिला दूसरी घरेलु महिला का सम्मान करें और उसके स्वाभिमान को ठेस ना पहुंचाये ।तभी हम साशक्त समाज की स्थापना कर पाएंगे ।एक नारी दूसरी नारी का सम्मान करें ,तभी हम नारी उत्थान कर सकते हैं ।परिवार के सभी सदस्य एक दुसरे का आभार व्यक्त करें ,प्रसंशा करें और श्रेष्ठ कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें तभी हम एक सच्ची मानवता की पहचान बन सकते हैं।

कौशल विकास और शिक्षा नया कौशल सिखाने- आज के डिजिटल युग में घर बैठे यानी कोर्स किए जा सकते हैं डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग कोडिंग या कंटेंट राइटिंग जैसे क्षेत्रों में ऑनलाइन सर्टिफिकेट्स कोर्स किए जा सकते हैं ।

रुचि को व्यवसाय में बदलना- यदि उन्हें खाना बनाना, सिलाई, पेंटिंग या बागवनी पसंद है तो इससे छोटे स्तर पर बिजनेस जैसे होम बेकरी, बूटीक, नर्सरी के रूप में विकसित किया जा सकता है।

 वित्तीय स्थायित्व-निवेश करके बजट में से थोड़ी-थोड़ी बचत करके जैसे सिप,म्युचुअल फंड या बचत योजना में लगाने की आदत डालें।

 बैंकिंग का ज्ञान -अपने बैंक खाते डिजिटल ट्रांसएक्शन और सरकारी योजनाओं जैसे महिला सम्मान बचत पत्र योजना , सुकन्या योजना के बारे में पूर्ण जानकारी रखें।

 मानसिक स्वास्थ्य -घर की जिम्मेदारी के साथ खुद के लिए भी टाइम निकलाना जरूरी है, किताब पढ़ना, गीत सुनना, या ध्यान करना। मानसिक तनाव को कम करता है। 

शारीरिक स्वास्थ्य -अपनी शारीरिक फिटनेस को प्राप्त करने के लिए नियमित योग या व्यायाम के लिए कम से कम 20 -30 मिनट जरुर निकाले।

 तकनीकी साक्षत शशक्तिकरण तकनीक का उपयोग- स्माटफोन और इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए ना करें ,इसका उपयोग ई-कॉमर्स ,प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने ,ऑनलाइन बैंकिंग करना भी सीखें।

 सोशल मीडिया का सकरात्मक उपयोग - लिंकएडिन जैसी प्रोफेशनल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाएं और अपने जैसे अन्य महिलाओं के समता उससे जुड़े। परिवार का सहयोग जिम्मेदारीयों का बंटवारा- परिवार के अन्य सदस्यओं के साथ काम का बंटवारा करने में संकोच ने करें। जब काम का बोझ बराबर होगा ,तभी महिला को स्वयं के विकास के लिए समय मिलेगा।

 खुला संवाद -अपनी महत्वाकांक्षाओं और जरूरतो के बारे में परिवार से स्पष्ट बात करें ।एक स्मार्ट एवम स्पोर्ट्स सिस्टम का होना बहुत जरूरी है ।

 एक विशेष सुझाव -कोई भी बड़ा बदलाव एक छोटे कदम से शुरू होता है, आप अपनी पसंद का एक छोटा सा काम आज से ही शुरू कर सकती हैं।अब घरेलु नारी का नया नाम house making women हो गया है।


- शकुन्तला अग्रवाल, जयपुर


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