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बराबरी का अधिकार

बराबरी का अधिकार

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"मां देखो भाभी का सिलेक्शन एयरहोस्टस के लिए हो गया।"प्रिया अपनी भाभी अवनी के लिए बहुत खुश थी।

अवनी की शादी को एक महीने ही हुए थे।पिता जी बीमार रहते थे इसलिए उनकी इच्छा थी कि बेटी अवनी की शादी का कन्या दान अपने हाथों से कर दे।

इस कारण अवनी ने अपने सपने बीच में ही छोड़ शादी कर की।एग्जाम इंटरवयू शादी से पहले हो चुके थे।लेकिन अवनी को उम्मीद नहीं थी कि कोई उसे एयरहोस्टेस के सपने में साथ देगा।

"भाभी अब तो आपको पार्टी देनी ही पड़ेगी। अब तो आप दुनिया की उड़ान भरने वाली हो।"प्रिया बोले चली जा रहीं थीं।

अवनी ने बस हल्की मुस्कान से प्रिया का जवाब दिया।

"क्या बोल रही है प्रिया अब अवनी इस घर की बहू है,उसे ये सब करने की क्या जरूरत।क्या कमी है हमारे घर में।"अवनी की सास ने अपना फरमान सुना दिया।

अवनी को पता था ऐसा ही होना है,इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया।

 क्यू जरूरत नहीं है सरिता जी,"अवनी के ससुर जी ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

"अवनी बेटी ,बधाई हो। बहुत कम लोग होते है जो सपने देखते है,ओर उनके सपने पूरे होते है। तुम्हारा इतना बड़ा सपना पूरा हुआ है,तुमने इसके लिए कड़ी मेहनत की होगी। हमें तुम पर गर्व है।

सरिता जी,सभी को अपनी जिंदगी जीने का हक है,हम किसी के सपने के बीच में आकर पाप के भागीदार क्यों बने।जैसे प्रिया हमारी बेटी है ,अवनी भी है।हमें दोनों की खुशियों में खुश हो ना चाहिए ।"

"हां मां आप भी भाभी को मौका दो जैसे आज तक मुझे आपने हर चीज करने की छूट दी है,आपको भाभी को भी देनी चाहिए। "प्रिया ने कहा।

"सही कह रहे हैं आप सब मैं भी दुनिया की बनाई बंदिशे अपनी बहू पर डाल रही थी,सब को अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है।बस परिवार में सब खुश रहे मुझे ओर क्या चाहिए। जा अवनी जल्दी से अमित को फोन करके खुश खबरी दे दे।"सरिता जी ने कहा

अवनी की आंखो में खुशियों की झड़ी लग गई।उसने सभी का बहुत धन्यवाद दिया। वह खुश थी कि उसके घर में बहू बेटी को बराबरी का दर्जा दिया जाता है। 


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