Varsha abhishek Jain

Romance


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Varsha abhishek Jain

Romance


प्यार हो जहां ले चल वहां-3

प्यार हो जहां ले चल वहां-3

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आज शिवी के आंगन में मंगल गीत गाए जा रहे है, घर मेहमानों से भरा पड़ा है। शिवी की मां सारी तैयारियों को भाग भाग कर पूरा की करवाने में लगी है। शिवी के पिता बारातियों के स्वागत की तैयारियाँ देख रहे है।

फूलों की झालर और लाइट से पूरे हवेली जगमगा रही है। मिठाई मेवे की खुशबू माहौल को मीठा बना रही है।

लेकिन...

शिवी अपने कमरे में दुल्हन के जोड़े में बैठी, आने वाले अनिश्चित भविष्य और अपने पहले प्यार के यादों के बीच अपने आप को फंसी महसूस कर रही है।

लाल जोड़े में सर से पैर तक सजी धजी शिवी अपने ख्यालों में ही खोई है। सखी सहेलियाँ शिवी को हँसी मज़ाक से चिढ़ा रही है। शिवी भी बाद हल्की मुस्कान से अपने दर्द को भूलने की कोशिश कर रही है।

"शिवी बहुत सुंदर लग रही हो, अजय जी तो आज तुम्हें देखते ही रह जायेगे।" रचना मलय की पत्नी ने शिवी का ध्यान भंग किया।

मलय ने अपने किए वादे अनुसार अपने साथ पढ़ने वाली रचना से शादी कर ली।

रचना आज के जमाने की लड़की, सुंदरता से परिपूर्ण, संस्कारों से गरीब, शहर के रहन सहन का पूरा असर रचना के व्यवहार में दिखता था। और सुंदरता का इतना घमंड शायद विश्व सुंदरी को भी नहीं रहा होगा।

"आओ रचना, कैसी है आप। मलय नहीं आया।" शिवी ने रचना को कहा।

"अच्छी हूं, मलय आया है नीचे ही रुक गया।" रचना ने कहा।

"और कैसी चल रही है तुम्हारी जिंदगी, एक महीना हो गया तुम्हारी भी शादी को।" शिवी ने हौले से पूछा। शायद मलय के दिल का हाल जानने के लिए 

"बस तुम दोनों की बचपन की कहानियां सुन कर एक महीना बीत गया।" रचना ने बनावटी हंसी के साथ कहा।

पत्नी को बुरा ही लगेगा अगर पति दूसरी लड़की की ही बात हर समय करे।

"अब नहीं करेगा। आज तो मैं चली ही जाऊंगी, हमेशा के लिए।" शिवी ने कहा।

"हां शायद।" रचना ने कहा।

मलय दरवाज़े पड़ खड़ा शिवी को देख रहा था। आज उसकी शिवी को उसने अजय के साथ विदा कर दिया।

कुछ महीनों बाद शिवी भी अजय के साथ लंदन चली गई।

अजय शिवी से बहुत प्यार करता था। शिवी प्यार तो नहीं करती थी लेकिन इज़्ज़त ज़रूर करती थी।

शिवी भी धीरे धीरे अपने गृहस्थी जमाने में लग गई। रह रह कर उसे मलय की याद ज़रूर आती थी। चाहती थी मलय से बात करे। अपने जिंदगी के बारे में उसे बताए, उसके जीवन में क्या चल रहा है उससे पूछ ले। लेकिन रचना की वजह से नहीं करती। उसे लगता कहीं उसकी वजह से मलय और शिवी में दरार ना आ जाए। मलय कभी फोन करता तो काम का बहाना बना कर फोन रख देती। धीरे धीरे मलय ने भी फोन करना बंद कर दिया।

2 साल बाद अचानक देर रात शिवी का फोन बजा।

शिवी भी घबरा गई इस वक्त मलय ने मुझे क्यों फोन किया वो भी इतने साल बाद।

डरते डरते शिवी ने फोन उठाया।

"हेल्लो"

"शिवी"

मलय इस वक्त, सब ठीक है ना। वहां सब कैसे है

"लौट आओ शिवी"

"क्या कह रहे हो मलय"

"नहीं रह सकता मैं तुम्हारे बिना। मेरी ही गलती थी जो तुम्हें जबरदस्ती जाने दिया।"

"ये मुमकिन नहीं मलय।"

"तुम्हारी भी शादी हो चुकी है। और अजय भी मुझे पत्नी का पूरा सम्मान देते है। कैसे आ जाऊँ।"

"मैं मर जाऊँगा शिवी।"

"ऐसा क्यों कहते हो। रचना कहाँ है। तुम दोनों के बीच सब ठीक नहीं लग रहा।"

"हमारे बीच सब ठीक था ही कब। वो अपने किटी पार्टी, क्लब, पार्टी इसी में रहती है। उसके लिए मेरे लिए वक्त नहीं। शादी के दो महीने बाद ही उसने मेरे परिवार से रिश्ता तोड़ दिया। मुझे भी मजबूरी में उसके साथ दूसरे घर में जाना पड़ा। परिवार का साथ छूट गया। घर में कोई बड़ा ना हो तो सब मनमर्जिया करने लगते है। वहीं हमारे साथ हुआ। उसकी फ़िजूल खर्ची और पार्टी मुझे पसंद नहीं, धीरे धीरे हमारी लड़ाइयाँ बढ़ने लगी। मेरा पैसा रचना को मुझे तलाक नहीं देने देता ओर मैं उसके साथ नहीं रह सकता।"

"मलय तुम्हारी जिंदगी में इतना कुछ चल रहा था और मुझे कुछ पता ही नहीं। मलय मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकती लेकिन तुम्हारी दोस्त की तरह तुम्हारा साथ ज़रूर दे सकती हूं.."


क्रमश :



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