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Anita Sharma

Tragedy

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Anita Sharma

Tragedy

ये कैसा एतबार

ये कैसा एतबार

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ज़िन्दगी तमाम गुज़र गई,

उन्हें इक बात समझाने में...

कि हमारी ज़िन्दगी उनसे है...

उन्हें एतबार ना हुआ...

उन्होंने ज़िन्दगी गुज़ार दी…बस हमें बेवफ़ा बताने में!


ज़िन्दगी तमाम गुज़र गई,

उनके लम्हे ख़ास बनाने में...

कि हमारा वक़्त उनका था,

उन्हें एतबार फिर ना हुआ....

उन्होंने ज़िन्दगी गुज़ार दी, बस वक़्त नहीं...के ताने में!


ज़िन्दगी तमाम गुज़र गई हमारी,

उनके सपने सजाने में...

कि हमारी खुशियाँ उनसे हैं,

उन्हें एतबार ही ना हुआ...

ज़िन्दगी गुज़ारते रहे वो...नाहक बस बिखराव जताने में!


ज़िन्दगी तमाम गुज़र गई हमारी,

बस एक उनका हो जाने में...

कि ज़िंदा हैं तो उनके लिए,

उन्हें एतबार फिर न हुआ....

उन्होंने ज़िन्दगी गुज़ार दी..हमें ज़िंदा लाश बनाने में!


ज़िन्दगी तमाम गुज़र गई हमारी,

उनके वहम मिटाने में,

कि खफ़ा हम नहीं उनसे,

उन्हें एतबार कब हुआ था जो होता,

उन्होंने ज़िन्दगी गुज़ार दी...बस हमें नाजायज़ फतवे सुनाने में!


अब ज़िन्दगी नहीं हमारी,

तमाम यादों में हैं...हम!

तस्वीर में डूबे हुए...

बनाते हुए...जाम पर जाम ,


आँखों में आँसू भर...

वो याद करते हैं हमें क्यूँकि

शायद उन्हें एतबार हो गया,

कि हमारी ज़िन्दगी गुज़री थी!

एक बस उनको ही रिझाने...

एकतरफा मोहब्बत निभाने में!


#चुप्पी



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