STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Tragedy

3  

AVINASH KUMAR

Tragedy

ये दिसम्बर का महीना

ये दिसम्बर का महीना

1 min
350

ये दिसम्बर का महीना

और वो नवम्बर की रातें

याद हरदम आती मुझको

तेरी हर वो कही बातें


न जानें कैसे तुझसे

जुड़ गये ये नाते

जो मुझको रात दिन रहते तड़पाते

न दिन का मुझे पता न गुजरे मेरी रातें

दें गये तुम न भूलनें वाली यादें


जीना न चाहा पर पड़ रहा जीना ऐसे

पपीहा व्याकुल हो स्वाती बूँद के लिए जैसे

जतन कोई बता दो तुम मिलोगे कैसे

या मेरे प्राण निकलेंगे तेरी विरह में वैसे


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy