STORYMIRROR

वक़्त वक़्त की बात है

वक़्त वक़्त की बात है

1 min
413


राहें थी फ़ूलों की,

सब साथ थे मेरे,

जब कांटों की बारी थी,

तो मैं अकेला था।


जमीं महफिलें, खूब हँसे,

सब साथ बैठे थे,

जब आँखें भिगोना था,

तो मैं अकेला था।


तय किया खुशियों का सफर,

कई यार थे मेरे,

जब समय ने ली करवट,

तो मैं अकेला था।


खुदा जब साथ था मेरे

बहुत से लोग आए थे,

जब थी ज़रूरत साथ की,

तो मैं अकेला था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama