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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा बाबा

Tragedy


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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा बाबा

Tragedy


वफादार नहीं हो तुम. .

वफादार नहीं हो तुम. .

1 min 210 1 min 210

आज वक्त नहीं उसके पास,

थे कभी हम जिसके साथ।

अब न कर मन्नतें बेहिसाब,

उसे याद नहीं दिल की बात।


यह वक्त याद रखेगा,

मगर हम भूल जायेंगे,

जिंदगी की राह में फिर,

कभी न हम लौट पायेंगे।


मत किया करो तलब,

तलबगार नहीं हो तुम,

न करो सजदा सनम,

वफादार नहीं हो तुम।



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