Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Anju Singh

Fantasy


4  

Anju Singh

Fantasy


वो सावन का झूला

वो सावन का झूला

1 min 344 1 min 344

हरियाला सावन‌ जब आता

उमंगों की बहार है लाता

आशाओं जैसी रिमझिम फुहार

झूम उठता सारा संसार


सावन के झूलों के साथ 

वो बचपन कहीं बीत गया

उन सुंदर लम्हों के साथ 

वक्त तेजी से फिसल गया


याद आतें हैं वो पल

मन थे कितने निश्चल

नई आस सी मन में जगती थीं

जिंदगी हिचकोले भरती थी


खुशनुमा वह सावन था

जब पेड़ पर झूले पड़ते थे

रिमझिम फुहारों के साथ

हम झूला झूला करते थे


रिमझिम बरसता सावन 

वो झूला और हरियाली

प्रकृति साथ लेकर आती

खुबसूरत सी हरियाली


सावन के आते ही

मेघ करतें शंखनाद 

प्रकृति की हरियाली ओढ़कर

हम खुशी में हो जातें उन्माद


जब पवन मचाते शोर

पंछी उड़ चलें गगन की ओर

पेड़ों पर डालकर झूलें 

लगता गगन को छू लें


सावन के झूलों का मौसम 

अब भी आता जाता है

पर बचपन का वह झूलना

बेहद याद आता है


जिंदगी शायद कुछ नहीं

बस यादों का मेला है

जहां हर समय हर कोई

वक्त के पहिए पर झूला है


काश वही बचपन कोई

फिर से लौटा दे

उन पेड़ों पर झूलना

और झूला दिला दें


भूल गए हम बहुत कुछ

मगर झूला भूलें नहीं

इस तरह कट रही है जिंदगी

सावन है ,झूलें हैं ,पर हम झूलतें नहीं


यादों के झूलें पर झूलती

वो मीठी सी कहानियां

कभी हंसती इठलाती थीं

बचपन की वो निशानियां


Rate this content
Log in

More hindi poem from Anju Singh

Similar hindi poem from Fantasy