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Praveen Kumar Saini "Shiv"

Romance Tragedy

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Praveen Kumar Saini "Shiv"

Romance Tragedy

विवाह का घर

विवाह का घर

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सुर्ख मेहंदी उसके हाथों में रची

खूबसूरत जोड़ा भी था लाल

लटें उसकी घुंघराली थी

सुरत उसकी भोली भाली थी

आंखों में आंसू की चमक थी

यादों में मेरे प्यार की नाव थी

डोरी आज उसकी किसी और

से बंध कर मुझसे टूट रही थी

विवाह का घर चहक और महक

रहा था कहीं पर डीजे का गाना

कहीं पर महिला संगीत की ध्वनि थी

मिठाई का खजाना तो खाने का

अंबार था उसका घर विवाह का घर था

मेरे यहां दुख था मातम था

सज रही थी अर्थी मुझे ले जाने को

पता भी ना था उसको प्यार की

तैयारी आखिरी सफर पर जाने की थी

उसके हाथ की मेहँदी पड़ रही काली थी

हो गये फेरे तैयारी विदाई की थी

मैं भी सज चुका था बारी अब जाने की थी

उधर वह गाड़ी में बैठ रही इधर

मेरी अर्थी भी कांधों पर चल पड़ी थी

हो गया आमना सामना समझ ना आया

उसे कि उसकी विदाई हमारी विदाई थी

उसका बसा था संसार मेरा उजड़ गया था

जीते जी ना जुदा होंगे हुए अलग तो साथ जान देंगे यह ही तो कसम हमने खाई थी

याद रहेगा जिंदगी भर यह विवाह के घर की कहानी थी।।



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