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Kanchan Prabha

Drama Romance

4.7  

Kanchan Prabha

Drama Romance

विरह वेदना के पल

विरह वेदना के पल

1 min
390


खोयी है धड़कनें सांसें उदास है

तेरी आहट तेरी खुशबू आस पास है

चुप है आसमान चुप है नजारे

उन्हें भी तेरे आने की आस है

रातें खामोश हो कर रहा करती है

जो सुबह जल जल कर ढहा करती है


छू कर कभी उसके मन को देखो

चाँदनी विरह वेदना सहा करती है

बारिश की बूँदें कुछ कहती भी है

तेरी अमानत साथ साथ रहती भी है

चुपके से वो कुछ कहती है कानों में 

सबसे खूबसूरत है वो जहानों में 

तेरी ही परछाई साथ साथ चलती है

चाँदनी भी दरीचे से जब ढलती है

महसूस तेरा साथ हर पल हुआ करता है 

फिर क्यूं जुदाई में ये दिल डरा करता है


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