STORYMIRROR

निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

Abstract

3  

निशान्त "स्नेहाकांक्षी"

Abstract

विपदा के साथी भगवान

विपदा के साथी भगवान

1 min
405

सुख संपदा के साथी हज़ार,

विपदा के साथी बस इक भगवान।


खुशियों के साक्षी भगवान,

 दुर्दिन के भी भागी भगवान।


फिर काहे चिंतित होत अजान,

जब हर क्षण साथी है भगवान।


 नहीं गलत कभी जिसका अनुमान,

 राजा रंक को परखे एक समान।


जो बुझना हो, परमपिता का ज्ञान,

तज दे काम, क्रोध, लोभ, अभिमान।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract