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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy

वीरान हुआ गांव

वीरान हुआ गांव

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बहुत सालों के बाद गांव आया हूं,

गांव की हालत को मैं देख रहा हूँ,

आज गांव को वीरान हुआ देखकर,

मेरे मन से बहुत दुःखी हो रहा हूं।


श्मशान गलियों में मैं चल रहा हूं,

शौक का आलम महसूस कर रहा हूं,

घरों की हालत पर नजर डालकर, 

मेरे मन से बहुत दुःखी हो रहा हूं।


खेतों को सूखा हुआ देख रहा हूं,

किसानों की परेशानी सुन रहा हूं,

बूढ़े लोगों की कहानी से तड़पकर,

मेरे मन से बहुत दुःखी हो रहा हूँ।


पहले की बसंत को याद करता हूं,

आज यहाँ पतझड़ को देख रहा हूं,

अन्न और जल की समस्या सुनकर,

मेरे मन से बहुत दुःखी हो रहा हूं,


गांव की बरबादी हटाना चाहता हूं,

गांव में हरियाली लाना सोच रहा हूं,

मैं अकेला यह कैसे करूंगा "मुरली",

यही सोचकर मैं दुःखी हो रहा हूं।



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