STORYMIRROR

वह मानव

वह मानव

1 min
426


वह मानव ही था

जो जीवन-मृत्यु के भँवर में

उलझा हुआ

क्षितिज पर खड़ा था।


वह मानव ही था

जो जीवन के बीते हुये पलों से

कुछ पल चुराता है और


इस जीवन के

माया जाल से मुक्त हो,

मानव जन्म से उऋण

होने को आतुर है।


वह मानव ही था

जो अपने मोक्ष की

कामना लिये हुये

जीवन और मरण के

क्षितिज के उस पार को

अग्रसर हो रहा है।


वह मानव ही था

जो उलझा हुआ था

जीवन-मृत्यु के भँवर में।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama